खस्ताहाल परिवहन व्यवस्था और बसों की कम संख्या पर बीते दिनों आलोचनाओं से घिरी दिल्ली सरकार अब इसे सुधारने में जुट गई है। दिल्ली सरकार एक बार फिर डीटीसी बसों में बंद पड़े या चोरी हो चुके जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) को लगाने जा रही है।
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के साथ हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है। खास बात है की इस बार बसों में जीपीएस लगाने और उसके रखरखाव की जिम्मेदारी खुद डीटीसी संभालेगी। जीपीएस लगने के बाद यात्रियों को खुद बसों की लाइव लोकेशन जानने के लिए ऐप की सुविधा दी जाएगी।
डीटीसी के बेड़े में फिलहाल 3944 बसें है। बसों में जीपीएस तो लगे थे, उसके रखरखाव और ट्रैक करने की जिम्मेदारी दिल्ली इंटीग्रेटेड मल्टी-मॉडल ट्रांजिट सिस्टम (डिम्ट्स) के पास था।
मगर बीते दिनों आई एक रिपोर्ट के मुताबिक डीटीसी बसों का जीपीएस या तो काम नहीं कर रहा है या फिर चोरी हो चुका है। इसके बाद सरकार ने डिम्ट्स को दिया गया यह ठेका रद्द कर दिया है।
डीटीसी खुद जीपीएस लगाने के साथ उसके देखभाल की जिम्मेदारी संभालेगी
डीटीसी बस
अब डीटीसी खुद जीपीएस लगाने के साथ उसके देखभाल की जिम्मेदारी संभालेगी, जो नई 1000 बसें खरीदने की प्रक्रिया चल रही है उसमें पहले से जीपीएस होगा।
जानकारी के मुताबिक जीटीसी के पास 3944 बसों में से 500 से अधिक बसों से जीपीएस डिवाइस चोरी हो चुका है। उसके अलावा 40 फीसदी बसें ऐसी हैं, जिनका ऑटोमैटिक व्हीकल लोकेशन सिस्टम (एवीएलएस) खराब हो चुका है।
इसके चलते जीपीएस से बसों को ट्रैक नहीं किया जा सकता है। नतीजतन अब सरकार ने डीटीसी को जल्द से जल्द बसों में जीपीएस लगाने और उससे बसों की लोकेशन को ट्रैक करने के लिए कंट्रोल रूम बनाने का निर्देश दिया है।
जीपीएस लगने के बाद ट्रैक कर पाएंगे बसें
डीटीसी बस का किराया हुआ कंम
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सूत्रों की माने तो दिल्ली सरकार जीपीएस के जरिए यात्रियों को यह पता चले सके की बस कब तक आएगी इसकी भी सुविधा उपलब्ध कराएगी।
जीपीएस लगने के बाद सरकार एक ऐप विकसित करेगी, जिससे यात्री मोबाइल फोन में उसे डाउनलोड करके खुद बस रूट नंबर को लाइव ट्रैक कर पाएंगे।
उसकी सही लोकेशन क्या है वह भी उन्हें पता चल जाएगा। हालांकि यह सरकार के दूसरे चरण की योजना है। फिलहाल सरकार बसों में दोबारा से जीपीएस लगाने व कंट्रोल रूम तैयार करने पर फोकस कर रही है।