गुड़गांव में आईपीएस विवाद ने प्रदेश सरकार को भी हिला दिया है। यही कारण है कि वह मामले पर सीधी नजर बनाए हुए हैं। पल-पल की गतिविधियों की जानकारी सरकार तक पहुंच रही है। मुख्यमंत्री के ओएसडी जवाहर यादव ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।
यादव ने बताया कि सरकार ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दे दिया है कि वह सच्चाई से अवगत कराएं। इस रिपोर्ट के बाद सरकार की ओर से उचित कार्रवाई की जाएगी।
दुष्कर्म के आरोप में गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाने व अपने जूनियर के सामने पुलिस आयुक्त के व्यवहार से क्षुब्ध संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा ने सच उजागर करने से पहले प्रदेश के एक कैबिनेट मंत्री व मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात की थी।
जहां पर उन्होंने अपने साथ हो रहे व्यवहार का जिक्र किया। जानकारों की मानें तो वह अक्सर शुक्रवार को वृंदावन जाती हैं। शुक्रवार को काम करके निकल जाने के साथ शनिवार तक वापसी होती थी। सामने यह भी आया था कि इस दौरान वह अवकाश नहीं लेती थीं। यह बात पुलिस आयुक्त को अच्छी नहीं लगी और बाहर जाने वाले किसी भी अधिकारी पर बिना अवकाश के जाने पर रोक लगा दी।
जानिए क्या है आईपीएस विवाद का सच
इसके साथ ही उनके आईपीएस पति विकास अरोड़ा के नाम से आवंटित मकान पर साढ़े छह लाख पैनेल इंटरेस्ट लगा दिया। साथ ही उनकी अनदेखी शुरू कर दी। इतना ही नहीं 22 सितंबर को आयोजित होने वाले कार-फ्री डे को भी हाईजैक करने की बात कही जा रही है।
बताया जा रहा है कि कार फ्री डे के पीछे प्लॉनिंग अरोड़ा की थी। प्रदेश सरकार के गठन के बाद नवदीप सिंह विर्क पुलिस आयुक्त के रूप में तैनात हुए। यहां से कैबिनेट मंत्री राव नरवीर से उनका 36 का आंकड़ा रहा है।
तीन दिन पहले नरवीर से भारती अरोड़ा ने मुलाकात की थी। भारती अरोड़ा की 23 जुलाई को पुलिस आयुक्त के साथ मुलाकात हुई थी। इसमें उनके जूनियर अधिकारी व मामले की जांच अधिकारी को यह कह कर धमकाया कि तुमने इसमें धारा 307 क्यों नहीं लगाई। इतना ही नहीं पुलिस आयुक्त ने भारती अरोड़ा को इस मामले से पीछे हटने को कहा अन्यथा नुकसान उठाने की धमकी भी दी थी।
हरियाणा सरकार के ओएसडी जवाहर यादव के मुताबिक प्रदेश में दो आईपीएस अधिकारियों के बीच छिड़ी जंग को सरकार गंभीरता से ले रही है। पुलिस महानिदेशक की जांच रिपोर्ट आने के साथ ही वह सत्य का साथ देने वालों के साथ हैं।
दूष्कर्म के तीन मामले दर्ज करा चुकी है पीड़िता
जिस दुष्कर्म पीड़िता को लेकर पुलिस आयुक्त और संयुक्त पुलिस आयुक्त में विवाद चल रहा है, उस पीड़िता द्वारा अलग-अलग तीन दुष्कर्म के मामले दर्ज कराए जा चुके हैं। संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा ने यह जानकारी दी है।
भारती अरोड़ा के अनुसार पीड़िता की जिससे पहले शादी हुई थी, वह उस पर दुष्कर्म का आरोप लगा चुकी है। इतना ही नहीं दोनों के बीच हुए समझौते में 40 लाख रुपया पीड़िता ने लिया था।
उक्त महिला ने दिल्ली में रहने वाले एनआरआई पर इस साल जनवरी में दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। जिसे रफा-दफा करने के लिए करोड़ों रुपये की मांग की थी। तीसरा मामला उसने लिव इन रिलेशन में रहने वाले अजय भारद्वाज पर दर्ज कराया। जो मल्टीनेशनल कंपनी में एग्जीक्यूटिव है।
सीपी ने अपने ई-मेल से पीड़िता को ई-मेल किया था
अजय गुड़गांव के पूर्व जिला उपायुक्त आरपी भारद्वाज का बेटा है। भारती अरोड़ा के मुताबिक वह सात साल से अजय भारद्वाज के साथ लिव इन में रह रही थी। उसके दो जुड़वा बच्चे हैं, जिनकी उम्र चार साल है। डीएनए टेस्ट में यह साबित हो चुका है।
बताया गया है कि पहली शादी से भी एक बच्चा है, जिसे अजय ने अपना नाम दे रखा है। इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मुख्यमंत्री के ओएसडी जवाहर यादव ने सरकार को दी है। इसके बाद सीएम ने डीजीपी से रिपोर्ट तलब की है।
पुलिस आयुक्त द्वारा पूरे मामले पर 11 पेज की रिपोर्ट डीजीपी को भेजी गई है। जिसमें अरोड़ा की ओर से लगाए गए आरोप का खंडन भी किया गया है। बिना अदालत की अनुमति के केस चलाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में चालान दुबारा किए जाने की बात भी कही गई है।
ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने बताया कि सीपी ने अपने ई-मेल से पीड़िता को ई-मेल किया था, जिसमें उन्होंने मामले के गवाह को धमकाने की बात कही थी। वही मेल पीड़िता ने गवाह के पास भेजा है। जिसके बाद उसी मेल को गवाह की ओर से डीजीपी को भेजा गया है।