केजरीवाल सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में अस्पताल प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कोरोना टेस्ट पर रोक लगाने को निर्देश दिए गए थे। उसी दिन सरकार ने यह घोषणा भी की थी कि 675 बेड वाले इस अस्पताल में अब 80 फीसदी बेड कोरोना वायरस के मरीजों के लिए आरक्षित होने चाहिए।
इस आदेश के बाद डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया था। उनका कहना था कि एक तरफ सरकार ने कोरोना टेस्ट के लिए मना कर दिया है और दूसरी ओर कोरोना मरीजों को भर्ती करने के लिए कहा गया है।
इसके बाद आज ही अस्पताल प्रबंधन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अस्पताल ने अपने ऊपर की गई प्राथमिकी को रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई के लिए अदालत ने 15 जून की तारीख निर्धारित की है।