ग्रेटर नोएडा में पति जिम्स के आइसोलेशन वार्ड में कोरोना से लड़ रहा है। पत्नी दो दिन से स्वास्थ्य विभाग से टेस्ट कराने की गुहार लगा रही है। कई बार फोन करने के बाद भी महिला और बेटी को न क्वारंटीन किया गया न ही टेस्ट कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के रवैये से दुखी महिला ने अब निजी अस्पताल से टेस्ट कराकर घर में क्वारंटीन रहने की ठानी है। ग्रेटर नोएडा की जीटा-1 स्थित एवीजे सोसाइटी निवासी एक व्यक्ति दिल्ली में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत हैं। वह प्रतिदिन ग्रेटर नोएडा से दिल्ली जाते थे। पिछले एक सप्ताह से उन्हें बुखार था। एक डॉक्टर से परामर्श लिया और एक निजी लैब से कोरोना संक्रमण की जांच कराई।
मंगलवार को पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर उन्हें जिम्स में भर्ती कराया गया। महिला ने बताया कि पति के संक्रमित होने पर कई बार स्वास्थ्य विभाग के नंबरों पर कॉल कर क्वारंटीन और टेस्ट कराने की गुहार लगाई। महिला का कहना है कि ब्लॉक और सोसाइटी ग्रुप पर भी सूचना दी। सोसाइटी के लोगों ने भी कई बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उसका कहना है कि जब से उसके पति की तबियत खराब हुई तभी से वह भी ग्रेटर नोएडा स्थित अपने इंश्योरेंस दफ्तर नहीं गई। उन्होंने बताया कि बेटी के साथ फ्लैट में खुद को क्वारंटीन कर रखा है। वहीं, महिला ने बताया कि प्रशासन की ओर से सोसाइटी और उनके ब्लॉक को भी सैनिटाइज नहीं किया गया है।
गाजियाबाद स्थित लोनी के अशोक विहार निवासी हमीद खां की कहानी भी बड़ी दर्दनाक है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को उनकी 22 साल की बेटी अफसान को बुखार था। वह उसे जीटीबी अस्पताल लाए, वहीं रात आठ बजे उसकी मौत हो गई। हमीद बेटी के शव के लिए रात तीन बजे तक शव लेने के लिए इंतजार करते रहे। फिर उन्हें कहा गया सुबह 9 बजे आना। सुबह उनसे बेटी का आधार कार्ड मांगा जाने लगा जो उनके पास नहीं था। शव भी मिल जाए तो हमीद कहते हैं कि उन्हें कब्रिस्तान ने शव दफनाने से मना कर दिया है। अब वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर वह क्या करें।
मरने वालों के कीमती चीजें हो रहीं गायब
दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल से लेकर तमाम अस्पताल से यह खबर आ रही है कि जिन लोगों की कोरोना से मौत हो रही है उनमें से कई लोगों के मोबाइल समेत तमाम कीमती चीजें गायब हो रही हैं।