नगर निगम कर्मचारियों को वेतन देने और अन्य खर्च चलाने के लिए राज्य सरकार ने 30 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर कर दी है। एक दो दिन में ग्रांट निगम के खाते में पहुंच जाएगी। इस धनराशि से शेष बचे निगम अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान किया जाएगा। लेकिन, अगले महीने फिर से वेतन की समस्या पैदा हो सकती है।
निगम सूत्रों ने बताया कि कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के कारण कामकाज ठप्प होने के बाद निगमायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने राज्य सरकार से विशेष ग्रांट देने की अपील की थी। चंडीगढ़ जाकर 30 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर कराई।
ग्रांट जल्द निगम खाते में आए, इसके लिए अकाउंट विभाग के अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। बृहस्पतिवार शाम तक निगम के दो अधिकारी चंडीगढ़ में ग्रांट रिलीज करने के लिए पैरवी करते रहे। निगम अधिकारियों का कहना है कि एक-दो दिन में मंजूर ग्रांट निगम खाते में आ जाएगी। दूसरी ओर, अगले महीने फिर से वेतन व अन्य खर्च चलाने के लिए संकट पैदा हो सकता है। क्योंकि एक महीने में 25 से 27 करोड़ रुपये नगर निगम को चाहिए होता है।
टैक्स वसूली में बरती जा रही लापरवाही के कारण निगम का खजाना खाली है। निगम का प्लानिंग विभाग ने ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है, जिससे निगम की आमदनी बढ़ सके। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अधिकारी निगम को चलाने के लिए कब तक कर्ज और ग्रांट लेते रहेंगे। इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।