जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया उन्हें शासन-प्रशासन ने भुला दिया है। नसरुद्दीन कारगिल युद्ध के बाद सर्च अभियान के दौरान शहीद हो गए थे। उनकी शहादत पर किए वादे भुला दिए गए हैं।
उनका परिवार सरकारों से आग्रह कर रहा है लेकिन उनके परिवार के किसी सदस्य को न नौकरी मिली और न ही नसरुद्दीन का स्मारक और उनकी कब्र बनी। हाल में ही शहीद का बेटा चंडीगढ़ में मुख्य सचिव से मिलकर आया है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है।
16 साल पहले हरियाणा और केंद्र सरकार ने भी मेवात जिला के इस बहादुर की याद में शहीद स्मारक बनाने की घोषणा की थी।आज उनकी कब्र को कांटेदार झाड़ियों और बरसात के समय होने वाले खरपतवार ने छुपा दिया है।
शहीद
- फोटो : अमर उजाला
पुन्हाना के छोटे से गांव हिंगनपुर का नायब सूबेदार नसरुद्दीन 24 राजपूत रेजीमेंट में कार्यरत थे। सर्च अभियान के दौरान आतंकवादियों से लोहा लेते हुए 13 अक्तुबर 2000 को शहीद हो गए थे।
16 अक्तुबर को प्रदेश के अन्य तीन वीर शहीदों के साथ मेवात के इस नायब सुबेदार का पार्थिक शरीर भी मेवात पहुंचा था। नायब सूबेदार नसरुद्दीन के अंतिम संस्कार में सरकार की ओर से तत्कालीन पशुपालन मंत्री मोहम्मद इलियास ने भाग लिया था।
गुडगांव के तत्कालीन उपायुक्त अपूर कुमार सिंह ने शहीद नसुरुद्दीन की याद में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 27.5 लाख रुपये की राहत राशि देने की घोषणा की थी और शाहचौखा से गांव हींगनपुर तक मार्ग और गांव औथा के हाई स्कूल को शहीद के नाम से रखने का एलान किया था।
हुई थी स्मारक बनाने की घोषणा
शहीद की पत्नी
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इसके अलावा शहीद का स्मारक बनाने की घोषणा की गई थी। डीसी के आदेश पर तुरंत हींगनपुर मार्ग और औथा हाई स्कूल पर शहीद नसरुद्दीन के नाम का बोर्ड लगा भी दिया था, लेकिन आज तक स्कूल और मार्ग को सरकार की तरफ से मंजूरी नहीं मिली, जिसकी वजह से इनसे नसरुद्दीन का नाम हटा दिया गया है।
नसरुद्दीन की पत्नी आशिया का कहना है कि उनका पति देश के लिये शहीद हुआ लेकिन सरकार उनकी कब्र पर कोई समाधि या स्मारक तक नहीं बना सकी। उनके बच्चों को सरकारी नौकरी नहीं दी गई। बेटा इरशाद का कहना है कि हाल ही में वह प्रदेश के मुख्य सचिव से मिला है। उन्होंने भरोसा दिया है कि जल्द ही उसे नौकरी दे दी जाएगी।
गांव हींगनपुर के याकूब नंबरदार, निजर मोहम्मद का कहना है कि सरकार ने शाहचौखा से हींगनपुर तक सडक और गांव औथा हाई स्कूल को नाम नसरुद्दीन के नाम से रखना था पर कागजों में आज तक नहीं चढ़ा।