-बढ़ती आग की घटनाओं को देखते हुए पीडब्ल्यूडी ने व्यापक स्तर पर फायर सेफ्टी इंतजामों की समीक्षा के जारी किए निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
राजधानी में बढ़ती आग की घटनाओं के बीच सरकारी इमारतों की सुरक्षा को लेकर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने अपने अधीन आने वाले सभी सरकारी अस्पतालों और अदालत परिसरों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने और व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं। पीडब्ल्यूडी प्रमुख की ओर से जारी आदेश में सभी संबंधित अभियंताओं को तत्काल प्रभाव से निरीक्षण करने को कहा है। इसमें खास तौर पर बिजली की वायरिंग, फिटिंग और अन्य उपकरणों की जांच पर जोर दिया है, जिन्हें आग लगने की प्रमुख वजह माना जाता है। साथ ही उन सभी संवेदनशील बिंदुओं की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जहां से आग लगने का खतरा बना रहता है।
विभाग 34 प्रमुख सरकारी अस्पतालों और दिल्ली हाई कोर्ट सहित आठ जिला अदालत परिसरों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल, डिस्पेंसरी, मातृ एवं कल्याण केंद्र सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी भवन भी पीडब्ल्यूडी के अधीन आते हैं। ऐसे में इस स्तर पर फायर सेफ्टी ऑडिट को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस तरह के निर्देश फरवरी में भी जारी किए गए थे, लेकिन गर्मी बढ़ने के साथ आग की घटनाओं में आई तेजी के बाद विभाग ने दोबारा सख्ती दिखाई है।
इससे साफ है कि विभाग अब फायर सेफ्टी को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। जिन प्रमुख अस्पतालों में यह ऑडिट और निरीक्षण कराया जाएगा, उनमें जीबी पंत अस्पताल, लोकनायक अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल, लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल, जगप्रवेश चंद्र अस्पताल, डॉ. हेडगेवार अस्पताल, इंदिरा गांधी अस्पताल, अंबेडकर अस्पताल और दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में रोजाना हजारों मरीज और तीमारदार आते हैं, जिससे यहां सुरक्षा व्यवस्था की मजबूती बेहद जरूरी हो जाती है। इसी तरह तीस हजारी कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट, साकेत कोर्ट, द्वारका कोर्ट और रोहिणी कोर्ट समेत सभी प्रमुख अदालत परिसरों में भी फायर सेफ्टी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि समय रहते खामियों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने से बड़े हादसों को टाला जा सकता है। ऐसे में यह ऑडिट और निरीक्षण अभियान राजधानी की संवेदनशील सरकारी इमारतों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।