इस तरह होगा इलाज
पंचकर्म अस्पताल में पांच विशेष क्रियाओं से शरीर की रोगों से सफाई की जाएगी। वमन (अमाशय की सफाई), विरेचन (आंत की सफाई), नस्य (कफ को बाहर निकालने), रक्तमोक्षण (खराब खून को शरीर से बाहर निकालने) और अनुवासनाबस्ती (शरीर में धातुओं का संतुलन करके) क्रियाओं से शरीर की रोगों से सफाई होगी। फिर अश्वगंधा, अरंड, आखा, निर्मुंडी, भांग, मेथी और अजवाइन के पत्तों को मारकीन के कपड़े में पोटली बनाकर विशेष सिंकाई होगी।
गठिया, जोड़ों के दर्द के इलाज के लिए उड़द के आटे में आयुर्वेदिक तेल को गर्म करके मालिश की जाएगी। इसके बाद धीरे-धीरे दवा के जरिये इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सर्वाइकल का सफल तरीके से यहां पर इलाज किया जा रहा है। मधुमेह, रक्तचाप इत्यादि के इलाज के लिए आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी तीनों चिकित्सा की सुविधा यहां मिलेगी।
बल्लीमारान अस्पताल का होगा विस्तार
पुरानी दिल्ली में बल्लीमारान आयुर्वेदिक अस्पताल का विस्तार किया जाएगा। अस्पताल की इमारत नई सिरे से बनाई जाएगी। इसके अलावा यहां भी पंचकर्म केंद्र खोलने पर निगम विचार कर रहा है। हिंदुराव अस्पताल में हेपेटाइटिस क्लीनिक की स्थापना की जाएगी। महरौली, शाहगंज, शाहबाद डेयरी, घोंडा, ताजपुर, चंद्रावल नगर, मजलिस पार्क और फाटक हबास खान की यूनानी डिस्पेंसरियों की इमारतें नए सिरे से बनाई जाएंगी।
आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा बढ़ाने जा रहा निगम
आयुष विभाग के अधिकारियों को मुताबिक, निगम आयुर्वेदिक पद्धति से इलाज की सुविधा बढ़ाने जा रहा है। हैदरपुर का अस्पताल तकरीबन तैयार है। वहीं, तिलक नगर में आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा दूसरे कई अस्पतालों में केंद्र बनाने की योजना है।