देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार डीयू के पूर्व प्रोफेसर एसएआर गिलानी की जमानत याचिका शुक्रवार को अदालत ने खारिज कर दी। पुलिस का तर्क था कि जमानत पर छूटने के बाद गिलानी जांच को प्रभावित कर सकता है।
पुलिस ने उसे 16 फरवरी 2016 को गिरफ्तार किया था। पटियाला हाउस अदालत के महानगर दंडाधिकारी हरविंदर सिंह ने शुक्रवार को मामले की सुनवाई की। पुलिस ने कोर्ट से कहा कि गिलानी के खिलाफ देशद्रोह व जन भावना को भड़काने का मामला बनता है।
उसने न केवल देश के खिलाफ नारेबाजी की बल्कि संसद हमले में मौत की सजा पाने वाले आतंकी अफजल गुरु को शहीद बताते हुए उसकी बरसी मनाई।
गिलानी की ओर से अधिवक्ता सतीश टामटा ने कहा कि उनके मुव्वकिल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। पुलिस का कहना है कि प्रेस क्लब में 10 फरवरी को कार्यक्रम में शोर शराबा होने पर वहां के सुरक्षा इंचार्ज व कर्मियों ने सबको शांत करने के बाद कार्यक्रम बंद करवा दिया था।
मामले में संदेहास्पद है प्रोफेसर का व्यवहार
ऐसे कार्यक्रम प्रेस क्लब में पहले भी होते रहे हैं। नारेबाजी करने व लोगों को भड़काने के आरोपों की पुष्टि के लिए कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है। केवल न्यूज चैनल की एक क्लिप है, जिसके आधार पर पुलिस ने केस बनाया है।
अभियोजन पक्ष ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज करते हुए कहा कि गिलानी का व्यवहार इस मामले में शुरू से ही संदेहास्पद रहा है। प्रेस क्लब में कार्यक्रम के लिए प्रोफेसर अली जावेद के जरिये हॉल बुक हुआ, लेकिन पेमेंट गिलानी के क्रेडिट कार्ड से हुई।
उस समय गिलानी अपने पीएसओ के साथ अंदर न जाकर प्रेस क्लब के बाहर ही रहा। आवेदन फार्म मुजसिर ने भरा और उस पर दस्तखत उमेर ने किए। इन लोगों के बारे में भी गिलानी ने कुछ नहीं बताया है और जांच में कोई सहयोग नहीं किया है।
एसएआर गिलानी ने पुलिस पर उसके मोबाइल से छेड़छाड़ करने की आशंका जाहिर की है। अदालत ने पुलिस की दलीलों के मद्देनजर संसद मार्ग थाने के मालखाना मुंशी को शनिवार को रजिस्टर के साथ पेश होने का निर्देश दिया है।
पुलिस को मिली गवाही कराने की अनुमति
कोर्ट में अर्जी दायर कर गिलानी ने कहा है कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने उसका मोबाइल लेकर छानबीन कर ली थी लेकिन उसके बाद उसे सील नहीं किया। पुलिस ने मोबाइल को सील नहीं किया ऐसे हालात में मोबाइल या उसके रिकार्ड से छेड़छाड़ की जा सकती है।
पुलिस ने इसके जवाब में कहा कि गिलानी को 16 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। उससे दो दिन पूछताछ की गई और इस दौरान उसके मोबाइल की भी जांच की गई।
इसके बाद मोबाइल को सील कर मालखाने में जमा करवा दिया गया था। इस मोबाइल को वहां से नहीं निकाला गया और वह आज भी वहीं है। पुलिस ने इस मामले में एसएआर गिलानी पर शिकंजा कसने के लिये प्रेस क्लब सुरक्षा इंचार्ज जितेंद्र सिंह व कर्मचारी अरुण को कोर्ट में पेश कर मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान करवाने की अर्जी दी।
कोर्ट ने अर्जी स्वीकार करते हुये जांच अधिकारी को बयान दर्ज करवाने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद पुलिस ने लिंक मजिस्ट्रेट के समक्ष इन गवाहों के बयान दर्ज करवाये। देर शाम तक इन गवाहों के बयान दर्ज करवाने की प्रक्रिया चल रही थी।