डब्ल्यूएचओ जहां हर साल टीबी के खात्मे की बात करता है वहीं खतरनाक टीबी के रोगियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। अब एक्सडीआर (एक्सटेसिवली ड्रग रेसिस्टेंट) के मरीजों की संख्या में इजाफा होने लगा है।
यह टीबी के खतरनाक स्तर की अवस्था है हालांकि इसकी दवा भी जनपद में मिलने लगी है लेकिन इसका सक्सेस रेट काफी कम है। जनपद में एक साल के अंदर तीन एक्सडीआर के मरीज चिह्नित हुए हैं, जिसमें विजयनगर और लोनी के मरीज शामिल हैं।
वर्ल्ड टीबी डे पर डब्ल्यूएचओ ने इस बार ‘यूनाइट टू एंड टीबी’ (टीबी के खात्मे के लिए एकजुट हों) का नारा दिया है। टीबी के लिए लगातार बजट भी जारी किया जा रहा है, लेकिन टीबी के खत्म होने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
जनपद में 2015 दिसंबर तक 218 एमडीआर के मरीज मिलें हैं, जिनकी संख्या में इजाफा हो रहा है। 2014 में यह संख्या 163 और 2013 में इसकी संख्या 66 थी। सामान्य टीबी के मरीजों की संख्या 8,975 है।
क्या है एक्सडीआर
एक्सडीआर (एक्सटेसिवली ड्रग रेसिस्टेंट) टीबी की दवा की ईजाद होने से देश के लाखों मरीजों को फायदा मिलेगा। एक्सडीआर टीबी की उच्चतर श्रेणी है। जहां कोई दवाएं असर नहीं करती थी। ड्रग रेजिस्टेंस (प्रतिरोधी क्षमता) पैदा होने से इन मरीजों पर डॉट्स की वर्तमान रिजीम की दवा भी कारगर नहीं थी।