गाजियाबाद। बैंक धोखाधड़ी के मामले में विशेष सीबीआई कोर्ट ने मेरठ निवासी मीशु को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष छह माह के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर दस हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। मामला वर्ष 2010-11 का है, जब पंजाब एंड सिंध बैंक की मेरठ स्थित दीवान पब्लिक स्कूल शाखा से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवास ऋण लिया गया था।
अदालत से मिली जानकारी के अनुसार आरोपियों ने बैंक के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अन्य लोगों की मिलीभगत से झूठे कागजात तैयार कर लोन स्वीकृत कराया। जांच में सामने आया कि मीशु ने अपने पति प्रमोद कुमार समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर फर्जी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे। संपत्ति से संबंधित कागजात और मूल्यांकन रिपोर्ट भी गलत तरीके से तैयार कराई गई थी। ऋण स्वीकृत होने के बाद रकम अलग-अलग चेक के माध्यम से निकाल ली गई। मामले की जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल किया गया और सुनवाई के दौरान पर्याप्त साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। विचारण के दौरान मीशु ने अदालत में अपना अपराध स्वीकार करते हुए दया की अपील की। विशेष सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश अश्विनी कुमार ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसे धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश का दोषी मानते हुए तीन वर्ष छह माह के कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।