गाजियाबाद। इस बार एसएसी वर्ग में मतदान के प्रति बदलाव की बयार दिखाई दी। एक प्रत्याशी से नाराज समाज के मतदाताओं ने परंपरागत वोट देने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसका कारण था कि प्रत्याशी का प्रचार रंग नहीं ला पाया था, वह एक क्षेत्र विशेष में ही सिमट कर रह गए थे। स्थिति यह थी कि नंदग्राम क्षेत्र, साहिबाबाद, विजयनगर सहित कई क्षेत्रों में पार्टी प्रत्याशी का बस्ता भी नहीं लग पाया था। इस कारण से दलितों में बदलाव की रंगत दिखाई दी।
सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता साजिद हुसैन का कहना था कि एक समय था कि नेताजी मुलायम सिंह यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली में लोग कई मील का सफर तय कर पहुंचते थे लेकिन अब भाजपा के इशारे पर काम करने वाली मायावती की सच्चाई जनता जान चुकी है, इसलिए समाज का वोट बैंक भी गठबंधन के साथ जुड़ चुका है। इसके अलावा पार्टी प्रत्याशी लोकसभा क्षेत्र में प्रचार के दौरान भी संपर्क नहीं कर सके, इसका भी असर पड़ा है।
विपक्ष उड़ा रहा अफवाह
वहीं, बसपा के जिलाध्यक्ष दयाराम सैन का दावा है कि बहन जी का वोट बैंक कभी खिसक नहीं सकता है। यह विपक्षी पार्टियां सिर्फ अफवाह उड़ा रही हैं। सैन का दावा है कि कविनगर में रैली ने एक बदलाव का काम किया है। इससे एसएसी वर्ग के अलावा हर वर्ग के लोग जुड़े हैं। उन्हाेंने दावा किया है कि मुस्लिम और सामान्य क्षेत्र से भी उनके प्रत्याशी के पक्ष में मतदान हुआ है।
बसपा को वोट देने का अर्थ था भाजपा को लाभ
86 वर्षीय अधिवक्ता हरी सिंह का कहना है कि अगर बसपा को वोट करते तो वह भाजपा के पक्ष में चला जाता है। हमारी वोट से भाजपा को फायदा पहुंचता। इसके अलावा मायावती लोगों के संपर्क से दूर हो चुकी हैं। जनता बदलाव चाहती है, इसलिए इस बार समाज के अधिकांश लोगों ने मतदान में बदलाव किया है। विजयनगर, बोंझा, पटेलनगर, भीमनगर, सिब्बनपुरा, मालीवाड़ा, दीनागढ़ी, जटवाड़ा, दौलतपुरा, जयप्रकाशनगर, मुरादनगर में जलालपुर, कृष्णा नगर, वसुंधरा के सेक्टर एक, दो, तीन, चार, दस, 11 व 12, भोवापुरा सहित अन्य क्षेत्रों में लोगों ने परंपरागत वोट में बदलाव किया है।