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Ghaziabad News: ये कैसा प्रतिबंध...डीएमई पर दौड़ रहे दोपहिया, कुचले जा रहे नियम

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राजू मलिक
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गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध का दावा कागजों तक सिमटकर रह गया है। भारी-भरकम चालान व सख्ती के दावों के बावजूद बाइक सवार बेखौफ एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भर रहे हैं और जिम्मेदार विभाग तमाशबीन बने हैं। एंट्री प्वाइंट पर निगरानी तक नहीं है। इससे कोई भी बाइक सीधे हाईस्पीड लेन में पहुंच जा रही है।
इसका खामियाजा यह कि बीते 14 महीनों में 43 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद न तो प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जा रहा है और न ही हादसों को रोकने के लिए ठोस इंतजाम किए जा रहे हैं। अगर बाइक सवार आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच रहे हैं तो सवाल लाजिमी है कि आखिर जिम्मेदार एजेंसियां क्या कर रही हैं।
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2022 में लगा था प्रतिबंध
बढ़ते हादसों को देखते हुए अगस्त 2022 में डीएमई और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर दोपहिया वाहनों के संचालन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। नियम तोड़ने वालों पर चालान की राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई थी। इसके बावजूद एक्सप्रेसवे पर बाइक सवार आसानी से प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही तेज रफ्तार वाहनों के बीच बाइक सवारों के हादसों में जान जाने का सिलसिला थम नहीं रहा।

एंट्री प्वाइंट से नदारद पुलिस, जिम्मेदार कौन
जिले में डीएमई की लंबाई करीब 20 किलोमीटर है और यहां छह प्रमुख एंट्री प्वाइंट हैं। इनमें भोजपुर टोल प्लाजा, आईएमएस डासना, आईपीईएम कॉलेज, एबीईएस कॉलेज और खोड़ा कट के सामने के एंट्री प्वाइंट शामिल हैं। बाइक सवारों के साथ हो रहे हादसों का बड़ा कारण इन एंट्री प्वाइंट पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती का अभाव माना जा रहा है। यातायात पुलिस का दावा है कि डीएमई पर रोजाना 16 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है और दो शिफ्टों में 32 पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। जमीनी हकीकत इससे अलग है। अधिकांश एंट्री प्वाइंट पर पुलिसकर्मी दिखाई नहीं देते। आरोप है कि कई बार पुलिसकर्मी एंट्री प्वाइंट पर तैनात रहने के बजाय चालान के लक्ष्य पूरे करने और वसूली में व्यस्त रहते हैं।

14 माह में 107 सड़क हादसे, नहीं टूट रही नींद
यातायात पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर 107 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 43 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि नौ लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। हादसों में जान गंवाने वालों में सात नाबालिग, दो बच्चे और 11 महिलाएं भी शामिल हैं। कई महंगे वाहन भी हादसों में क्षतिग्रस्त हुए हैं।

चेतावनी बोर्ड और संकेतों की भी कमी
एक्सप्रेसवे पर गलत दिशा में वाहन चलाने के वीडियो अक्सर वायरल होते रहते हैं। इसके पीछे एक कारण चेतावनी बोर्ड और संकेतों की कमी भी मानी जा रही है। जो बोर्ड लगे हैं, वे काफी ऊंचाई पर और छोटे आकार के हैं। इससे तेज रफ्तार में चल रहे वाहनों से उन्हें पढ़ पाना मुश्किल होता है। कई एंट्री प्वाइंट पर तो चेतावनी बोर्ड लगे ही नहीं हैं।

चालानों से भरा खजाना, लेकिन हादसे जारी
डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुन बिशेन के अनुसार, वर्ष 2025 में मोटर वाहन अधिनियम के तहत जिले में 14,35,596 चालान किए गए। इनसे कुल 305 करोड़ 55 लाख 12 हजार 850 रुपये का राजस्व वसूला गया। इनमें सबसे अधिक दोपहिया वाहन चालकों के चालान हैं।

वर्ष 2025 में हुए चालान
बिना हेलमेट : 6,82,359
गलत दिशा में वाहन चलाने पर : 1,89,040
ट्रिपल राइडिंग : 59,541
शराब पीकर वाहन चलाने पर : 3,623

एक्सप्रेसवे पर हाल में हुए हादसे
5 मार्च 2026- एक बाइक पर दिल्ली जा रहे तीन लोग सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराए। हादसे में बाइक चला रहे संभल निवासी वीरपाल (40) की मौत हो गई। दो अन्य लोग घायल हुए।
15 फरवरी 2026- मुरादनगर गंगनहर जा रहे दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी ज्योतिष पात्रा (35) रास्ता भटककर डीएमई पर पहुंच गए। यहां एक कैंटर ने उन्हें कुचल दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
27 जनवरी 2026- सिकंदराबाद के डोला निवासी 18 वर्षीय नाजिम की बाइक मेरठ लेन में फ्लेक्स पोल से टकरा गई, जिससे उनकी मौत हो गई।
25 नवंबर 2025- एक वैन चालक ने गलत दिशा में गाड़ी चलाते हुए बाइक सवार तीन लोगों को टक्कर मार दी। हादसे में बाइक चला रहे जितेंद्र (40) निवासी क्रॉसिंग रिपब्लिक की मौत हो गई।
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11 नवंबर 2025- विजयनगर क्षेत्र में डीएमई पर लोहे के सरियों से भरे ट्रेलर से टकराकर बाइक सवार तीन किशोर आर्यन (16), भावुक तोमर (15) और मयंक (11) निवासी शांति नगर की मौत हो गई।
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर एक नजर
जिले में लंबाई : करीब 20 किमी
प्रमुख एंट्री प्वाइंट : 6
14 माह में हुए हादसे : 107
हादसों में मौत : 43
दिव्यांग हुए लोग : 9
मृतकों में नाबालिग : 7

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