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Ghaziabad News: जलापूर्ति का हाल बेहाल, कहीं सूखे नल तो कहीं दूषित पानी

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साहिबाबाद। टीएचए में पेयजल संकट ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। गंगाजल की आपूर्ति बंद होने के बीच क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों से कहीं घरों में पानी नहीं पहुंच रहा तो कहीं नलों से दूषित और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, मोहननगर, कड़कड़ मॉडल गांव और अर्थला सहित कई इलाकों में लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। त्योहार के दौरान पेयजल की समस्या ने घरेलू बजट भी बिगाड़ दिया है। लोगों को पीने और खाना बनाने के लिए बाजार से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।
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नगर निगम की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में सड़क, नाला और नाली निर्माण सहित विकास कार्य कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन कार्यों के दौरान पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और समय पर मरम्मत नहीं होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है। शिकायतों के बावजूद कई स्थानों पर समस्या बनी हुई है। गंगाजल की आपूर्ति बंद होने के बाद से ही इलाके में पानी आना मानो बंद सा हो गया है। इंदिरापुरम के शक्ति खंड-4 निवासी प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि उनके इलाके में 48 घंटे से पानी नहीं आया। घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है। उनका कहना है कि नगर निगम की ओर से टैंकरों की व्यवस्था भी नहीं की गई। वहीं, अभय खंड-3 में मंगलवार को दूषित पानी की आपूर्ति हुई। स्थानीय निवासी रोहन कुमार के मुताबिक, पानी से सीवर जैसी दुर्गंध आ रही थी। वहीं कड़कड़ मॉडल के निवासी रेनू ने बताया कि इलाके में करीब सप्ताह भर से गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। इसके चलते लोगों को आए दिन बोतल बंद पानी खरीदना पड़ रहा है। वहीं वैशाली के सेक्टर-3, 4, 5 और 6 में पेयजल लाइनों की खराबी से आपूर्ति प्रभावित होने के साथ सड़कों पर भी पानी बह रहा है। सेक्टर-3 निवासी डॉ. सुनील वैद्य के अनुसार, मुख्य पाइपलाइन में रिसाव से पानी बर्बाद हो रहा है और सड़क पर जलभराव की स्थिति बन रही है। सेक्टर-4 और 6 में भी पर्याप्त पानी नहीं मिलने की शिकायतें हैं।
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विकास कार्य बना आफत
वैशाली और इंदिरापुरम में सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों के बीच पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्यों के दौरान पेयजल लाइनों की सुरक्षा और निगरानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों ने पाइपलाइनों की जांच, मरम्मत और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं पेयजल संकट के कारण परिवारों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। इंदिरापुरम शक्ति खंड-4 निवासी संतोष शुक्ला ने बताया कि उनके घर में पीने और खाना बनाने के लिए 20 लीटर की तीन बोतलें मंगानी पड़ती हैं। एक बोतल की कीमत 100 रुपये है, जबकि तीसरी मंजिल तक पानी पहुंचाने के लिए 50 रुपये अतिरिक्त देने पड़ते हैं। इस तरह प्रतिदिन 350 रुपये खर्च हो रहे हैं। उनका कहना है कि त्योहार के समय पहले से ही खर्च बढ़ा हुआ है, ऐसे में पानी खरीदना मजबूरी बन गया है।
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वर्जन
क्षतिग्रस्त पेयजल लाइनों की जांच और मरम्मत कराई जा रही है। मंगलवार को अर्थला और इंदिरापुरम में मरम्मत कार्य कराया गया। अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी काम कराकर लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
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केपी आनंद, महाप्रबंधक, जलकल विभाग
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