गाजियाबाद। मध्य एशिया में चल रहे युद्ध का असर अब उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार अस्थिरता से केमिकल और प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी अनिश्चितता के कारण नए ऑर्डर मिलने की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है। इससे गाजियाबाद में केमिकल और प्लास्टिक उत्पादों से जुड़ी करीब 4000 इकाइयों के सामने कारोबार को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कच्चा तेल प्लास्टिक और केमिकल उद्योग के लिए प्रमुख कच्चे माल का आधार है। तेल की कीमतों में तेजी आते ही प्लास्टिक ग्रैन्यूल, रेजिन समेत कई पेट्रोकेमिकल कच्चे माल महंगे हो जाते हैं। इससे पाइप, प्लास्टिक कंपोनेंट, पैकेजिंग सामग्री और अन्य उत्पाद बनाने वाली इकाइयों की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। दूसरी ओर, तैयार माल के दाम तत्काल बढ़ाना आसान नहीं होता। ऐसे में बढ़ी लागत का दबाव सीधे उद्यमियों के मार्जिन पर पड़ता है।
ऑर्डर पर भी पड़ रहा असर अरोड़ा केमिकल इंडस्ट्री के मालिक कैलाश अरोड़ा का कहना है कि युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। खरीदार नए ऑर्डर देने से पहले बाजार की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इसका असर खासकर निर्यात से जुड़े कारोबार पर पड़ रहा है। कुछ कंपनियां पुराने ऑर्डर पूरे करने के लिए लागत बढ़ने के बावजूद उत्पादन जारी रख रही हैं, लेकिन नए ऑर्डर को लेकर सतर्कता बढ़ गई है।
दोहरी मार झेल रहा उद्योग
प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाले पाइप उद्योग से जुड़े उद्यमी विक्रम अग्रवाल का कहना है कि उद्योग पहले ही महंगे कच्चे माल, बिजली, परिवहन और वित्तीय लागत जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। अब कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने नई परेशानी खड़ी कर दी है। यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक अस्थिर रहती हैं तो उत्पादन लागत का अनुमान लगाना मुश्किल होगा। इसका सीधा असर उत्पादों की कीमत, ऑर्डर और मुनाफे पर पड़ेगा। उद्यमी अरुण शर्मा की मांग है कि सरकार पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की कीमतों पर निगरानी रखे और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को लागत के इस दबाव से राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाए। गाजियाबाद में करीब 4000 इकाइयां केमिकल और प्लास्टिक उद्योगों से जुड़ी हैं। इन इकाइयों का तैयार माल विदेशों तक जाता है। ऐसे में पेट्रो पदार्थों की कीमतों में अस्थिरता से उद्योगों के सामने संकट बढ़ गया है।