हापुड़। बुखार से पीड़ित मरीजों की कोशिकाएं कमजोर पड़ रही हैं। लिवर पर सूजन और आंतों में संक्रमण मरीजों को परेशान कर रहा है। इस मौसम में कानों से संबंधित समस्याएं भी बढ़ी हैं। अस्पतालों की ओपीडी में हर रोज ऐसे 200 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं।
बारिश के बाद वायरल बुखार के साथ डेंगू और मलेरिया भी बढ़ा है। सीएचसी के फिजिशियन डॉ.अशरफ अली ने बताया कि देर से इलाज कराने और लापरवाही बरतने के कारण यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। तेज बुखार, पेट दर्द, उल्टी और थकान जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें।
जिस मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक कमजोर है, उसे कई तरह की बीमारियां दिखाई दे रही हैं। तेज बुखार होने से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। कोशिकाएं ठीक होने से बाद बीमारी ठीक हो रही है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी पिएं, बाहर के तैलीय और मसालेदार भोजन से परहेज करें। बुखार की स्थिति में तुरंत जांच कराएं। समय पर इलाज मिलने से संक्रमण रोका जा सकता है।
बुखार आने के बाद बरतें सावधानी
* तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें
* हरी सब्जियों और फलों का नियमित सेवन करें
* कुछ दिनों घर पर आराम करें
* बासी भोजन, जंक और फास्ट फूड का सेवन न करें।
बुखार का कानों पर भी पड़ रहा असर
ईएनटी डॉ. मोहिनी सिंह का कहना है कि वायरल इंफेक्शन की वजह से यूस्टेकियन ट्यूब पर सूजन आ जाती है, जो इंटरनल ईयर की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इंटरनल ईयर शरीर के संतुलन का काम करता है। इसके आसपास की कोशिकाएं नष्ट होने से कानों में कुछ दिनों के लिए परेशानी होती है।