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वसुंधरा जोन में 8 की जगह अब होंगे 22 वार्ड

Wed, 12 Apr 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ गाजियाबाद
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नगर नगर - फोटो : अमर उजाला
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2011 की जनगणना के आंकड़ों पर वार्डों के परिसीमन का काम नगर निगम ने पूरा कर लिया है। 80 से बढ़कर शहर में अब 100 वार्ड हो जाएंगे। 2001 से 2011 के बीच वसुंधरा जोन में आबादी सबसे तेजी से बढ़ी है।
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वसुंधरा जोन में अब 8 की बजाय 22 वार्ड होंगे। मोहन नगर जोन में 6 वार्ड और विजय नगर जोन में 2 वार्ड बढ़ेंगे। कविनगर जोन में 2 वार्ड कम हो जाएंगे और सिटी जोन में वार्डों की संख्या समान रहेगी।

शासन ने 12 अप्रैल तक वार्ड परिसीमन की रिपोर्ट मांगी थी। शासन के आदेश मिलते ही निगम अफसरों ने अन्य सभी काम छोड़कर परिसीमन का काम शुरू कर दिया। मंगलवार शाम अधिकारियों ने वार्डों के परिसीमन की फाइनल रिपोर्ट तैयार कर ली।
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अब इस रिपोर्ट को डीएम के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। निगम अधिकारियों ने परिसीमन की इस रिपोर्ट को गोपनीय रखा है। अमर उजाला को सूत्रों ने बताया कि शहर भर के वार्डों में एक भी वार्ड ऐसा नहीं बचा, जिसकी सीमा में बदलाव न हुआ हो।

कई वार्डों का तो अस्तित्व ही नहीं बचा। अन्य वार्डों में उनका विलय हो गया है। वहीं, सबसे ज्यादा वार्ड वसुंधरा जोन में बढ़े हैं, जबकि दूसरे नंबर पर वार्डों की संख्या में बढ़ोतरी मोहन नगर जोन में हुई है। यहां 6 वार्ड बढ़ गए हैं। विजय नगर जोन में क्रांसिंग्स रिपब्लिक समेत कई कालोनियों में आबादी बढ़ने से 2 वार्ड बढ़ गए हैं।

सिटी जोन में वार्ड की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। हालांकि पुराने शहर में दो वार्ड कम हुए हैं, लेकिन नंदग्राम क्षेत्र में दो वार्ड बढ़ गए हैं। ऐसे में कुल वार्ड की संख्या में कोई अंतर नहीं आया है।

विभिन्न जोन में प्रस्तावित वार्डों की संख्या
जोन         पूर्व में वार्ड      प्रस्तावित वार्ड
वसुंधरा जोन         08         22    
मोहननगर जोन         18        24
सिटी जोन         23        23
विजयनगर जोन         14        16
कविनगर जोन         17        15

कविनगर जोन में दो पार्षदों का ‘किला’ ढहा
कविनगर जोन में चुनाव लड़ने से पहले ही दो पार्षदों का किला ढह गया। 2012 में जहां कविनगर जोन में 17 पार्षद चुनाव जीते थे, वहीं इस बार 15 पार्षद चुनाव जीत पाएंगे।

चुनाव जीतने के बाद सभी 17 पार्षद अब आगामी चुनाव में मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने जी जान लगाकर विकास कार्य भी कराए लेकिन परिसीमन में दो वार्ड खत्म हो जाने से उनके मंसूबों पर पानी फिर गया।

वार्ड परिसीमन का फार्मूला बदला
2017 से पहले 2005-06 में वार्डों का परिसीमन हुआ था। उस वक्त 2001 की जनगणना के आधार पर हुए परिसीमन में एक वार्ड की आबादी का मानक 9000 और इससे 15 फीसदी कम या ज्यादा का था।

अब 2017 में किए जा रहे परिसीमन में वार्ड की आबादी 16.5 हजार और इससे 15 फीसदी कम या ज्यादा का रखा गया है। पूर्व में हुए परिसीमन के दौरान कई वार्ड ऐसे थे जिनकी आबादी 8 से 9 हजार के बीच थी। अब ऐसे वार्डों का स्वरूप ही बदल गया है।

गांवों को मिलाकर बनेंगे दो वार्ड
टीएचए में दो वार्ड गांवों को मिलाकर बनाए जाएंगे। एक वार्ड में कड़कड़ मॉडल और महाराजपुर और दूसरे वार्ड में साहिबाबाद गांव और झंडापुर को शामिल किया गया है। वहीं इंदिरापुरम में 3 वार्ड की बजाय अब 7 वार्ड होंगे। वैशाली में 3, कौशांबी में 2 और वसुंधरा कालोनी में एक की बजाय 4 वार्ड प्रस्तावित किए गए हैं।

राजनीतिक दबाव से अछूते नहीं रह सके अफसर
जैसे ही निगम अफसरों ने परिसीमन का काम शुरू किया, वैसे ही उन पर राजनीतिक दबाव भी पड़ना शुरू हो गया। सूत्रों की मानें तो चार जनप्रतिनिधियों का भी परिसीमन में सीधा हस्तक्षेप रहा है। उनके इशारे पर कई बार प्रस्ताव में बदलाव भी किया गया है।

सूत्रों की मानें तो निगम अफसरों ने सोमवार शाम को ही परिसीमन का प्रस्ताव फाइनल कर लिया था, लेकिन बदलाव की वजह से ही इसे रोक लिया गया। मंगलवार को इसमें बदलाव कर अंतिम रूप दिया गया।

शासन से मंजूरी के बाद होगा नोटिफिकेशन
प्रक्रिया के मुताबिक वार्डों के परिसीमन प्रस्ताव को शासन के पास भेजा जाएगा और इसका नोटिफिकेशन जारी होगा। इसके बाद लोगों से इस पर आपत्तियां मांगीं जाएंगी।

मिलने वाली आपत्तियों का निस्तारण करने के बाद इसका फाइनल गजट नोटिफिकेशन जारी होगा। तब वार्डों के नए स्वरूपों को मान्यता मिलेगी। इसके बाद वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी।
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