कैग ने बृहस्पतिवार को सदन के पटल पर अपनी रिपोर्ट रखी है।
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सीएजी की टीम जीडीए में सात साल में हुए कार्यों और लेनदेन का ऑडिट करेगी। हालांकि वर्ष 2016 में करीब चार महीने तक सीएजी की टीम जीडीए में ऑडिट कर चुकी है, लेकिन बाद में शासन के कहने पर इसे रोक दिया गया था।
सूत्रों की मानें तो कैग की टीम करीब 60 फीसदी फाइलों का ऑडिट कर चुकी थी लेकिन अब पुरानी फाइलों को नए सिरे से खंगाला जाएगा और सभी फाइलों का ऑडिट दोबारा होगा।
वर्ष 2016 के शुरू में ही सीएजी की टीम जीडीए पहुंच गई थी। जीडीए ने टीम को पत्रावलियां भी मुहैया करा दी थी। ऑडिट के दौरान कई फाइलों पर आपत्तियां भी लगी थीं।
बाद में जीडीए अधिकारियों ने शासन को इसकी सूचना दी तो बाद में एक्ट का हवाला देकर शासन ने इसे रोक दिया था। मामला गर्माया तो राज्यपाल तक पहुंच गया था। राज्यपाल ने जीडीए में कैग ऑडिट कराए जाने को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भी भेजा था।
जीडीए सूत्रों के मुताबिक जून 2016 में जीडीए में फिर से कैग की टीम पहुंची थी, लेकिन उसे बैरंग लौटा दिया गया था। अब शासन से आदेश जारी होने के बाद कैग ऑडिट शुरू हुआ।
जीडीए अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2011-12 से 2017 तक की फाइलों का ऑडिट किया जाएगा। सीएजी टीम जिस विभाग या कार्य से संबंधित पत्रावलियों चाहेंगे उन्हें उपलब्ध करा दी जाएंगी।