गाजियाबाद। खाने-पीने के सामान की फटाफट जांच करने के लिए केंद्र सरकार ने गाजियाबाद में 50 लाख रुपये कीमत की स्पेशल वैन तो भेज दी लेकिन 10 महीने बीत जाने के बाद भी यह चल नहीं पाई है। वजह है टेक्नीशियन की नियुक्ति न हो पाना। चलती फिरती प्रयोगशाला की तरह काम करने वाली वैन के माध्यम से लोगों को मिलावट के प्रति जागरूक भी किया जाना है लेकिन यह तभी मुमकिन होगा जब यह चलेगी।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथाॅरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) की ओर से भेजी गई इस लैब को मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेट्री नाम दिया गया। इसे फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स भी कहा जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) को यह वैन सौंपी गई। इससे पहले मेरठ मंडल को एक-एक वैन दी गई थी। इसके परिणाम अच्छे आए। परिणाम देखकर जिले को अलग से वैन भेज दी गई।
वैन के तीन काम हैं। पहला मिलावट की जांच का। इसमें घी, दूध, मावा, मिठाई, तेल, नमकीन और मसालों की जांच फटाफट की जा सकती है। वैन गली-गली जाएगी। इसलिए, लोग आसानी के घर के पास ही जांच करा सकते हैं। वैन की प्रयोगशाला में विशेष उपकरणों से पांच मिनट के अंदर मिलावट की जांच हो जाती है।
दूसरा उपयोग है प्रशिक्षण में। खान-पान के सामान का काम करने वाले लोगों को मिलावट की जांच का प्रशिक्षण मिलेगा। इसका प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। तीसरा काम लोगों को जागरूक करने का। गली-गली जाकर लोगों को मिलावट के बारे में बताया जाएगा। वैन में फूड सेफ्टी इंस्पेक्टर की भी तैनाती होगी। इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
30 जिलों में भेजी गई है एक-एक वैन
प्रदेश के 30 जिलों में एक-एक वैन भेजी गई है। सभी वैन पिछले साल जुलाई में भेजी गई थीं। जिलों में गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, वाराणसी, गोरखपुर, मुरादाबाद, कानपुर, गाजीपुर, बाराबंकी, जौनपुर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा और अयोध्या शामिल हैं। इससे पहले छह मंडलों में एक-एक वैन भेजी गई थी। इस तरह अब तक 36 वैन आ चुकी हैं।
दो महीने लगते हैं जांच में
जिले में हर महीने, दूध, पनीर, मावा, मसाले, दाल, मिठाई और तेल के लगभग 20 से 25 नमूने लिए जाते हैं। इनकी जांच के लिए लखनऊ भेजा जाता है। रिपोर्ट आने में दो महीने का समय लग जाता है।
बयान
टेक्नीशियन की नियुक्ति हो जाने के बाद ही वैन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। नियुक्ति के लिए शासन को पत्र लिखा जा चुका है। अब रिमाइंडर भेजा जाएगा। नियुक्ति होते ही वैन का इस्तेमाल शुरू कर दिया जाएगा। - अरविंद कुमार यादव, सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा विभाग