कौशांबी। देश की जासूसी करने वाले आरोपियों से बरामद हुए मोबाइल फोन और सिमकार्ड की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट अप्रैल माह के पहले सप्ताह से मिलनी शुरू हो जाएगी। पुलिस डाटा मिलने के बाद आरोपियों और उनके साथियों को गिरफ्तार करेगी। जांच में आए तथ्यों की बात कहें तो जासूसी मामले के बड़ी संख्या में आरोपियों की धर-पकड़ हो सकती है। वहीं, जासूसी मामले की विवेचना एनआईए को भी जल्द ट्रांसफर होने की बात कही जा रही है।
पुलिस ने 14 मार्च को देश की जासूसी करने वाले छह लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ और छानबीन में सामने आया कि आरोपी देश के सैन्य व सुरक्षाबल ठिकानों, धार्मिक स्थलों व अन्य प्रमुख प्रतिष्ठानों की फोटो-वीडियो व जीपीएस लोकेशन पाकिस्तान भेज रहे थे। यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठा सरदार उर्फ सरफराज उर्फ जोरा सिंह चला रहा था। व्हाट्सएप ग्रुप पर लोगों को जोड़ कर रुपयों का लालच देकर उनसे यह काम कराया जा रहा था। यहां तक कि आरोपियों ने दिल्ली कैंट और सोनीपत रेलवे स्टेशन पर सोलर बेस्ड सीसीटीवी कैमरे भी लगाए थे। पुलिस ने उन्हें भी बरामद कर जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा। सूत्रों के अनुसार पुलिस अभी तक केवल दो ही मोबाइल फोन की फॉरेंसिक रिपोर्ट मिली है। उनके आधार पर 21 लोगों की गिरफ्तारी हुई। सभी आरोपियों के 24 मोबाइल फोन की फॉरेंसिक रिपोर्ट एक-एक करके अप्रैल के शुरुआती सप्ताह से मिलना शुरू हो जाएगी। अप्रैल के दूसरे सप्ताह में बड़ी संख्या में जासूसी के अन्य आरोपी गिरफ्तार हो सकते हैं।
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फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट मिलने के बाद गिरोह से जुड़े कई आरोपियों की तलाश, फंडिंग व अन्य बिंदुओं पर जांच को आगे बढ़ाया जाएगा। नाम सामने आने पर उनकी गिरफ्तारी की जाएगी। धवल जयसवाल, डीसीपी सिटी