नगर निगम ने एक ही काम दो फर्मों को दे दिया है। पहले शहर के मुख्य मार्गों की स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस का काम विज्ञापन फर्मों को बीओटी पर दे दिया गया था। अब 60 हजार एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाने के साथ मेंटेनेंस का काम पीपीपी मॉडल पर प्राइवेट फर्म को दे दिया गया है। इस कंपनी को बिजली की बचत से होने वाली रकम से करोड़ों का भुगतान किया जाएगा।
यानी अब बीओटी फर्मों को स्ट्रीट लाइटों का मेंटेनेंस भी नहीं करना होगा। यह फर्में सिर्फ कमाई ही कमाई करेंगी और निगम पैसा लुटाएगा।नगर निगम ने शहर के 32 मुख्य मार्ग बीओटी (बिल्ट ऑपरेट एंड ट्रांसफर) पैटर्न पर दिए हुए हैं, जो सड़क जिस फर्म को दिया गया था, उसे उस मार्ग की स्ट्रीट लाइटों का मेंटेनेंस करना था।
अपना खर्च निकालने के लिए बीओटी फर्मों को डिवाइडरों पर यूनिपोल और विज्ञापन लगाकर कमाई करने की इजाजत दी गई थी। वर्ष 2013 में हुए कांट्रेक्ट में नगर निगम ने फर्म के लिए डिवाइडर मेंटेन करना भी अनिवार्य कर दिया था।
अधिकांश फर्में पहले ही स्ट्रीट लाइटों की मेंटेनेंस नहीं कर रहीं थीं, अब निगम ने शहर की सभी 60 हजार सोडियम लाइटें हटाकर एलईडी लाइटें लगाने का कांट्रेक्ट रांची, झारखंड की एक फर्म ‘व्हाइट प्लेकार्ड टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड’ को दे दिया है। पीपीपी मॉडल पर प्राइवेट फर्म अपने खर्च पर इन लाइटों को बदलेगी।
बिजली बिल से होने वाली बचत की 75 फीसदी हिस्सा देकर नगर निगम उसकी रकम चुकाएगा। एलईडी लाइटों की 7 साल तक मेंटेनेंस भी वही फर्म करेगी। यानी बीओटी फर्मों पर अब कोई भार नहीं रहेगा। वह विज्ञापन से कमाई तो करेंगी, लेकिन लाइटों का मेंटेनेंस नहीं करेगी।
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इन मार्गों को दिया गया है बीओटी पर
अंबेडकर रोड, मेरठ रोड, कलक्ट्रेट रोड, हापुड़ चुंगी रोड, जीटी रोड, गोविंदपुरम कालोनी के मुख्य मार्ग और वसुंधरा कालोनी के मुख्य मार्ग।
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नहीं किया नफा-नुकसान का आकलन
नगर निगम अधिकारियों ने स्ट्रीट लाइट बदलने की स्कीम तो लागू कर दी, लेकिन इससे नफे-नुकसान का आकलन नहीं किया। इस स्ट्रीट लाइट स्कीम से निगम को आर्थिक नुकसान और 32 बीओटी फर्मों को फायदा होगा।
एलईडी लाइटों का पैसा शुरुआत में नगर निगम को भले ही न देना पड़ रहा हो, लेकिन हर साल नगर निगम को बिजली बिल की बचत से फर्म को किस्तों में भुगतान करना पड़ेगा। यह भुगतान 7 से 8 करोड़ रुपया सालाना होगा।
स्ट्रीट लाइट बदलने का काम अभी शुरू नहीं किया गया है। बीओटी फर्मों के अनुबंधों की समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों से वार्ता कर इसका हल निकालेंगे।
- अशु वर्मा, महापौर