गाजियाबाद। कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में कमिश्नरेट पुलिस ने दो बदमाशों के खिलाफ स्वापक औषधि मनःप्रभावी पदार्थ यानी अवैध व्यापार निवारण (पीआईटी एनडीपीएस एक्ट) लगाने की तैयारी कर ली है। 25 मई 2026 को पुलिस आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अपराध मेरठ में मंडलायुक्त से सहमति लेकर कार्रवाई करेंगे। पिट एनडीपीएस एक्ट लगाने पर इस धंधे में लिप्त आदतन अपराधी दोनों भाई विभोर राणा और विशाल राणा को एक से दो वर्षों तक जमानत नहीं मिल पाएगी।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने बताया कि पिट एनडीपीएस एक्ट एक कठोर कानून है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थों की तस्करी में बार-बार शामिल रहने वाले आदतन अपराधियों को रोकना और जमानत के लिए अधिकतम दो वर्षों तक हिरासत में रखने का प्रावधान है। ऐसे में ड्रग्स माफिया, नशा तस्करों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट्स की रोकथाम होती है। बताया कि कोडीनयुक्त कफ सिरप तस्करी मामले में विभोर राणा और विशाल सिंह मुख्य आरोपी हैं।
इन पर करीब 150 करोड़ के अवैध सिंडिकेट चलाने का आरोप है। फर्जी कंपनियों के जरिये कफ सिरफ की खरीद-फरोख्त कर इसे बिहार, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक नशे के रूप में अवैध रूप से तस्करी करते थे। सहारनपुर के रहने वाले विभोर राणा और विशाल सिंह इस तस्करी का मास्टर माइंड बताया जा रहे हैं। दोनों आरोपियों ने विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर फर्जी दवा फर्में जैसे जीआर ट्रेडिंग, मारुति मेडिकोज और एबी फार्मास्युटिकल के जरिये फर्जी बिल से प्रतिबंधित कफ सिरप की तस्करी करने का आरोप है। बताया कि दोनों की करीब 12.55 करोड़ रुपये की संपत्ति भी पुलिस ने कुर्क कर ली है। बताया कि एनडीपीएस के अंतर्गत दोनों भाइयों ने कोर्ट में जमानत अर्जी डाली थी। इनमें से एक को जमानत मिल गई है। डीसीपी सिटी ने बताया कि मंडलायुक्त से अनुमति लेकर पिट एनडीपीएस लगाने के बाद आरोपियों को जेल भेजा जाएगा।