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हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाने को यमुना में बनेगी सुरंग

Wed, 22 Jun 2016 01:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /गाजियाबाद
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ट्रेन
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एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने दिल्ली टू मेरठ हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। अगर इस प्रोजेक्ट पर काम समय से चला तो 2021 में यह ट्रेन दौडने लग जाएगी। यह ट्रेन दिल्ली के निजामुद्दीन से चलकर गाजियाबाद होते हुए मेरठ के पल्लवपुरम तक 90 किलोमीटर की दूरी 45 मिनट में तय करेगी। खास बात यह भी होगी कि यमुना नदी के नीचे सुरंग बनाई जाएगी जिससे ट्रेन गुजरेगी।
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एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के सूत्रों ने बताया कि दिल्ली-मेरठ कॉरीडोर के 90 किलोमीटर में महज नौ किलोमीटर हिस्सा दिल्ली में आ रहा है। 50 किलोमीटर गाजियाबाद और बाकी का हिस्सा मेरठ में आएगा। यह ट्रेन निजामुद्दीन से आनंदविहार होते हुए वैशाली मेट्रो स्टेशन के निकट तक सुरंग से आएगी। यहां से ट्रेन एलीवेटेड हो जाएगी। वैशाली से ट्रेन मोहन नगर पहुंचेगी जहां एक स्टेशन हाईस्पीड ट्रेन का और दूसरामेट्रो का होगा।

मोहननगर से नया बस अड्डा तक मेट्रो जिस रास्ते से गुजरेगी उसी रास्ते से मेट्रो से थोडा हटकर हाईस्पीड ट्रेन मेरठ तिराहे तक जाएगी। मेरठ तिराहे से एनएच-58 के रास्ते मुरादनगर, मोदीनगर होते हुए मेरठ में प्रवेश करेगी। मेरठ के कैंट एरिया में ट्रेन एक बार फिर सुरंग में घुसेगी। वहां करीब चार किलोमीटर लंबी सुरंग होगी। पल्लवपुरम अंतिम स्टेशन होगा। दिल्ली से मेरठ के बीच कुल 17 स्टेशन होंगे।
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6 हजार करोड रुपये बजट बढा
हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट का बजट 2011 में 18 हजार करोड रुपए था। अब इसे बढाकर 24 हजार करोड कर दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि यमुना नदी के नीचे सुरंग बनाने में बडी राशि खर्च होगी। ऐसे में बजट 24 हजार करोड से ऊपर भी जा सकता है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा हाईस्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए बनाई गई कंपनी एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन लिमिटेड प्रोजेक्ट में कुल लागत का 70 प्रतिशत लोन अंतर्राष्ट्रीय स्तर की किसी वित्तीय एजेंसी से लेगी। बाकी तीस प्रतिशत रकम के भुगतान का जिम्मा दिल्ली और यूपी की सरकार उठाएगी।

कागजी काम में लग जाएगा एक साल
सूत्रों ने बताया कि प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद फिलहाल एनसीआर ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन 2011 में बनाई गई डीपीआर के एप्रूवल की तैयारी में जुटी है। शहरी विकास मंत्रालय से एप्रूवल मिलने के बाद प्रोजेक्ट की बीडिंग होगी। फिर फाइनेंसियल क्लोजिंग तैयार की जाएगी। इसके बाद प्रोजेक्ट अवार्ड निर्माण कंपनी को दी जाएगी। निर्माण कंपनी से एमओयू और एमओए साइन होंगे। इस प्रक्रिया में करीब एक साल लग जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि एक मोटे अनुमान के अनुसार निर्माण कार्य पूरे होने में करीब तीन-चार साल लग जाएंगे। हाईस्पीड के 90 किलोमीटर लंबे ट्रैक के निर्माण का जिम्मेदारी कारपोरेशन उठाएगी जबकि हाईस्पीड के परिचालन और रखरखाव के लिए पीपीपी मोड पर निजी क्षेत्र की सहभागिता वाली कंपनी ढूंढृी जाएगी।
 मेट्रो से ज्यादा तेज दौडेगी

दिल्ली मेट्रो सौ से 120 किलोमीटर तक की स्पीड में चलती है जबकि हाईस्पीड ट्रेन 180 किलोमीटर की रफ्तार से दौडेगी। दिल्ली से मेरठ की दूरी 45 मिनट में तय करेगी। चूकि यह लंबी दूरी की ट्रेन होगी इसलिए इसमें मेट्रो से कहीं अधिक सीटें होंगी। ट्रेन में टॉयलेट की व्यवस्था भी होगी।
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