गाजियाबाद। बदला हुआ परिसीमन, दिल्ली फार्मूला लागू होने की कानाफूसी और जीडीए द्वारा की जा रही सीलिंग की कार्रवाई से भाजपाई टेंशन में हैं। भाजपाइयों की चिंता की वजह यह है कि कहीं इन तीनों मामलों के चलते निकाय चुनाव में उनके हाथ से मेयर की कुर्सी न खिसक जाए।
नगर पालिका से निगम बनने के बाद से ही गाजियाबाद मेयर की सीट हमेशा भाजपा की ही झोली में गई है। शहर के ज्यादातर व्यापारी भाजपा से ही जुडे़ हुए हैं। पिछले दिनों जीडीए की अवैध निर्माण और सीलिंग के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई के बाद जनता को ‘फील गुड’ का अहसास कराने का दावा करने वाले भाजपा के विधायक-मेयर ही अब खुद ‘फील बैड’ का अहसास करने लगे हैं।
जीडीए की यह कार्रवाई अब शहर भर में चर्चा का विषय बनती जा रही है। इसको लेकर भाजपाइयों की नींद भी उड़ने लगी है। जीडीए की इस कार्रवाई की शिकायत प्रदेश स्तर पर सीएम योगी आदित्यनाथ से भी की जा चुकी है, मगर हालत यह है कि जीडीए का खौफ आज भी व्यापारियों में है।
दूसरी ओर निकाय चुनाव में वार्डों की संख्या बढ़ने और कुछ नए वार्ड बनने से भी भाजपाइयों की नींद हराम हो गई है। कई ऐसे वार्ड हैं, जहां से भाजपा का ही पार्षद चुना जाता रहा है, मगर नए परिसीमन और आरक्षण से इस बार भाजपा को अपनी कई सीटें गंवानी पड़ सकती हैं।
भाजपा नेताओं के पास कई वार्डों से ऐसी शिकायतें भी पहुंच रही हैं कि बीएलओ द्वारा उनके वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं। घूकना, नंदग्राम, सेवा नगर आदि कई वार्डों में नाम काटने की शिकायत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंची है।
दिल्ली में हुए निकाय चुनाव में नए चेहरे को पेश कर भाजपा ने यह संकेत दे ही दिया है कि इस बार वह यूपी में भी दिल्ली फार्मूले को लागू कर सकती है। हालांकि अभी इसकी अधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं हुई है, मगर इस फार्मूले ने कई दिग्गज भाजपाइयों की भी नींद हराम कर दी है।