खैरुल और उसके गैंग की तलाश के लिए पुलिस उपायुक्त भीष्म सिंह व अन्यों की टीम ने जांच शुरू की। इस बीच सूचना मिली कि बदमाशों का गैंग दक्षिण दिल्ली के लाडो सराय में आना वाला है। सूचना के बाद पुलिस ने खैरुल, सादि और मोंट को गिरफ्तार कर उनसे जेवरात, कुछ चोरी का सामान और औजार बरामद किए। पूछताछ के दौरान खैरुल ने बताया कि वह 1997 से भारत में एक्टिव है। वह कई बार जेल भी गया है।
जेल में उसकी मुलाकात राजीव श्रीवास्तव नामक शख्स से हुई थी। राजीव गैंग के रहने और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था करता है। रात के समय पॉश इलाकों को टारगेट किया जाता है। खिड़की या दरवाजा काटकर घर में दाखिल हुआ जाता है। यदि सोते से कोई जाग जाता है तो उसे बंधक बनाकर वारदात की जाती है।
विरोध करने पर बदमाश गोली चलाने से भी गुरेज नहीं करते हैं। गैंग लीडर खैरुल 16, सादिक दो और मोंटू 19 वारदातों में शामिल रहा है। वारदात के बाद यह माल समेटकर बांग्लादेश भाग जाते थे। कुछ समय वहां बिताने के बाद दोबारा अवैध रूप से भारत में आकर दोबारा वारदातों को अंजाम देते थे।