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बुलंदशहर: 9 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट और 52 दिन में कोर्ट ने दुष्कर्मियों को सुनाई सजा

Sat, 06 Mar 2021 10:18 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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बुलंदशहर जनपद के डिबाई थाना क्षेत्र में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने एतिहासिक निर्णय सुनाया है। उन्होंने 52 दिन के भीतर ही आरोपियों को दोषी करार देते हुए 30-30 वर्ष कारावास और 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। 

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जनपद में गत सात माह में यह दूसरा सबसे जल्द सुनाया गया निर्णय है। इससे पूर्व दुष्कर्म के ही एक मामले में कोर्ट आरोपी को 83 दिनों में सजा सुना चुकी है। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो सुनील कुमार शर्मा, कोर्ट मोहर्रिर अजय कुमार, एडीजीसी रेखा शर्मा, विजय शर्मा ने बताया कि रामघाट थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने 12 जनवरी 2021 को थाने पर तहरीर दी थी। 

इसमें उसने बताया था कि उसकी 14 वर्षीय पुत्री 11 जनवरी की शाम को अपनी बहन के साथ पड़ोस में ही पशु बंधवाने के लिए गई थी। अंधेरा होने के कारण वह टॉर्च लेकर खड़ी हुई थी। आरोप है कि इस दौरान गांव निवासी आरोपी वीरेश और गीतम ने पीछे से आकर उनकी पुत्री को दबोच लिया। इसके बाद आरोपी उसे झोपड़ी में ले गए, जहां उन्होंने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। 
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बाद में आरोपी हत्या की धमकी देकर भाग निकले। पीड़िता ने घर पर पहुंच कर आपबीती बताई थी। वहीं, पुलिस ने मामले में तत्काल रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने 15 जनवरी को दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मामले में पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए नौ दिन के भीतर 21 जनवरी को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी थी। 

25 जनवरी से न्यायालय में मामले की सुनवाई व अन्य कार्यवाही शुरू हुई। न्यायालय में मामले की कुल 21 तारीखें हुईं और छह गवाहों ने इस दौरान अपने बयान दर्ज कराए। इसके बाद शनिवार को वारदात के 52वें दिन न्यायालय ने आरोपियों को दोषी करार देते हुए उन्हें 30-30 वर्ष कारावास व 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया है। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि पीड़िता को दिए जाने का निर्णय दिया है। 

मामले में न्यायालय ने यह की टिप्पणी 
अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम डॉ. पल्लवी अग्रवाल ने फैसला देते हुए कहा कि ग्रामीण परिवेश में रहने वाली बालिका के साथ पड़ोसी ही ऐसा करे तो समाज में बालिकाओं का जीवन यापन लगभग असंभव हो जाएगा। 

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सीओ और उनकी टीम ने की प्रभावी पैरवी
मामले की पैरवी खुद सीओ डिबाई वंदना शर्मा के निर्देशन में हो रही थी। उनकी टीम भी जुटी हुई थी। इसी का परिणाम है कि जनपद के न्यायालय से पीड़िता को एक बार फिर जल्द न्याय मिला है। एसएसपी संतोष कुमार सिंह ने घोषणा की है कि वह सीओ वंदना शर्मा और उनकी टीम को आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मानित करेंगे। 

इस तरह से मिला जल्द न्याय
11 जनवरी की देर शाम को वारदात हुई। 12 जनवरी को रामघाट थाना पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की। तीन दिन बाद 15 जनवरी को आरोपियों की गिरफ्तारी की और वारदात से ठीक नौ दिन बाद आरोपियों के खिलाफ 21 जनवरी को चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी गई। मामला 25 जनवरी को ट्रायल पर आया और अब तक कुल 21 तारीखें हुईं। इस दौरान अधिकतर तारीखों पर सीओ डिबाई खुद भी न्यायालय पहुंचीं। 

पिछला रिकॉर्ड सात माह में ही टूट गया
जनपद के डिबाई क्षेत्र में 24 जून की रात हुई एक दुष्कर्म की वारदात में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम वीरेंद्र कुमार तृतीय ने 83 दिन के भीतर ट्रायल पूरा कर सजा सुनाई थी। अब रामघाट प्रकरण में हुई 52 दिन की सजा प्रथम स्थान पर आ गई है। 

बोलीं अधिवक्ता
नौ दिन में पुलिस ने चार्जशीट फाइल की। साथ ही न्यायालय में कुल 21 दिन की तारीखों में सजा सुनाया जाना वाकई एतिहासिक है। इससे न्यायपालिका के प्रति लोगों का विश्वास और भी प्रबल होगा। पुलिस को महिला अपराध से जुड़े सभी मामलों में प्रभावी पैरवी करनी चाहिए। जिससे अपराधियों के बीच एक बेहतर संदेश जाए। 
-रेखा शर्मा, अधिवक्ता
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