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शहरों में हालात कुछ सुधरे, गांवों में बुरा हाल

Sun, 25 Dec 2016 12:52 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला /गाजियाबाद
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बैंक - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी के 46 दिन बाद अब धीरे-धीरे शहर के बैंकों की व्यवस्था सुधरने लगी है। शहरी क्षेत्र के बैंकाें में लोगों को जरूरत भर का पैसा मिल रहा है, हालांकि उन्हें अभी भी लाइन लगानी पड़ रही है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में कैश की किल्लत बरकरार है। बाजार के जानकारों का मानना है कि बैंकों ने अब तक जितना कैश बांटा है, उसका 40 से 45 प्रतिशत बाजार में फ्लो होने लगा है।
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नोटबंदी के बाद पैदा हुई स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। जहां पहले बैंकों से कैश लेने के लिए सुबह से ही लोगों की लाइन लग जाती थी, वह अब देखने को नहीं मिल रही है। कुछ ही बैंक हैं, जहां कैश को लेकर दिक्कत है और लोगों की लाइनें देखी जा रही हैं।

बाजार से जुड़े जानकारों के मुताबिक बैंकों ने अभी तक  अरबों रुपये लोगों को बांटे हैं, लेकिन जितना कैश बाजार में फ्लो होना चाहिए, उतना नहीं हुआ है। लोग नई करेंसी को बचाकर नहीं रखकर अगर कैशलेस ट्रांजेक्शन के साथ खर्च भी करने लगें तो दिक्कत काफी हद तक दूर हो जाएगी। 
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- बोले बैंक अधिकारी
एसबीआई के रीजनल मैनेजर एसके गोयल का कहना है कि स्थिति अब काबू में हो रही है। अधिकांश बैंक यदि पूरा 24 हजार कैश नहीं दे पा रहे हैं तो लोगों को उनकी जरूरत भर का पैसा जरूर दे रहे हैं। अब यह रुपया मार्केट में आना चाहिए। तब स्थिति पहले जैसी हो जाएगी। 30 दिसंबर के बाद सरकार क्या आदेश देती है, उसके मुताबिक बैंक कार्य करेंगे।

- बोले व्यापारी
किराना व्यापारी संजय गर्ग का कहना है कि मार्केट में धीरे-धीरे दो हजार के साथ 500 का नोट भी आने लगा है। इससे व्यापारियों को राहत मिली है। 100 के नोट भी पर्याप्त मात्रा में मिल रहे हैं, जिस वजह से किराने का सामान लेने के लिए छोटे व्यापारी आने लगे हैं। शुरुआत में काफी परेशानी हुई थी।

बैंकों में पहले बंटे थे कम नोट
नोटबंदी के बाद बैंकों के पास उतना कैश नहीं था कि वह लोगों को निर्धारित 24 हजार रुपये दे सकें। इसलिए कम धनराशि दी गई। मसलन इलाहाबाद बैंक में पहले 4 से 5 हजार दिए गए अब 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

नवयुग मार्केट स्थित एसबीआई में शुरुआत में 10 हजार दिए गए। बीच में कैश की स्थिति सुधरी तो 24 हजार तक कैश दिए गए। अब 10 से 15 हजार दिया जा रहा है। यूनियन बैंक की 25 ब्रांच में हमेशा से ही कैश की किल्लत रही।

सिंडिकेट बैंक की शहरी शाखाआें में चार हजार दिए गए। बाद में कैश बढ़ने पर इससे अधिक धनराशि दी जाने लगी। पीएनबी में बीच के माह में कैश की काफी कमी हो गई। तब 5 से 6 हजार रुपये ही मिलते थे।

अब ग्राहकों को 10 हजार तक  दिए जा रहे हैं। बैंक ऑफ इंडिया की हालत सबसे ज्यादा खराब रही। बैंक की महरौली ब्रांच में लोगों ने हंगामा भी किया और एनएच 24 पर जाम लगाया। अब बैंक में 5 से 8 हजार रुपये तक दिए जा रहे हैं। यही स्थिति प्राइवेट बैंकों की भी है। अधिकांश बैंकों ने टोकन सिस्टम अपनाकर कैश बांटा जिससे लोगों को भी कम परेशानी हुई।

- एटीएम में है बुरी स्थिति
शहर के 90 प्रतिशत एटीएम अभी भी सुचारु रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। एसबीआई, एक्सिस, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक के चुनिंदा एटीएम से ही कैश निकल रहा है। बाकी किसी भी बैंक के एटीएम में कैश नहीं है। लोगों का कहना है कि यदि बैंक एटीएम व्यवस्था को दुरुस्त कर दें तो 80 प्रतिशत समस्या खत्म हो जाएगी।

- कैशलेस ट्रांजेक्शन की दी जानकारी
केनरा बैंक वर्कर्स आर्गेनाइजेशन की ओर से लोगों को कैशलेस ट्रांजेक्शन की जानकारी दी गई। मार्केटिंग अधिकारी धीरज कुमार ने बताया कि डेबिट व क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करना बेहद आसान है। इससे न तो आपके साथ कभी लूटपाट होगी और न ही डर लगेगा।

विदेशों में 90 प्रतिशत लोग कैशलेस ट्रांजेक्शन के साधन अपनाते हैं। उधर, संस्कार द को-एजुकेशनल स्कूल में कैशलेस इंडिया पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में एसबीआई के अधिकारी अमित कुमार व नीरज कुमार ने बताया कि कैशलेस तरीके अपना कर हम काफी हद तक भ्रष्टाचार पर रोक लगा सकते हैं।

कई तरीके हैं। जैसे कैशलेस एप्स, डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना, इंटरनेट बैंकिंग। इन तरीकाें को अपनाने से काफी हद तक कैश पर निर्भरता को खत्म किया जा सकता है।
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