जिन फुट ओवर ब्रिज को जनता की सहूलियत बताकर शहर भर में खड़ा कर दिया गया, असल में जनता को उनका फायदा मिल ही नहीं रहा। फुट ओवर ब्रिज पर न तो लिफ्ट लगाई गई और न ही एस्केलेटर लगाए गए। जनता इन पर चढ़ने की बजाय डिवाइडर लांघ कर सड़क पार कर रही है।
इसी मुद्दे को लेकर 10 नवंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक में हंगामा भी हुआ। बावजूद इसके कुछ सुधार नहीं हुआ।पुलिस ऑफिस के सामने शोपीस बना एफओबीनगर निगम ने पुलिस ऑफिस और कलक्ट्रेट के सामने फुट ओवर ब्रिज का निर्माण किया था। वास्तव में यहां जितने लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं उनके लिए इसकी जरूरत भी है।
बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाएं और बच्चे भी आते-जाते हैं। एफओबी पर लिफ्ट या एस्केलेटर न होने की वजह से लोग इसका इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। कांट्रेक्टर फर्म के लिए यह एफओबी सिर्फ विज्ञापन कर कमाई करने के काम आ रहा है।हापुड़ चुंगी एफओबी का मामला पहुंचा हाईकोर्ट
हापुड़ चुंगी पर भी निगम ने बीओटी फर्म के माध्यम से फुट ओवर ब्रिज का निर्माण कराया है। इस एफओबी पर विज्ञापन लगाए जाने शुरू कर दिए गए हैं, लेकिन निगम से कंप्लीशन सर्टिफिकेट अभी तक नहीं लिया गया। यहां भी लिफ्ट, एस्केलेटर या रैंप नहीं बनाए गए। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग एफओबी की बजाय डिवाइडर लांघकर सड़क पार कर रहे हैं।
चिरंजीव विहार निवासी वेदप्रकाश अग्रवाल ने एफओबी पर लिफ्ट, एस्केलेटर लगाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर रखी है।लिफ्ट के बजाय रेलिंग करा दी ऊंचीनवयुग मार्केट के सामने बने एफओबी का लोगों ने इस्तेमाल न किया तो निगम ने इसके नीचे करीब 50 मीटर दूरी तक डिवाइडर और रेलिंग ऊंची करा दी। समाधान अब भी नहीं हुआ।
कुछ सुधार हुआ, लेकिन अधिकांश लोग अब ऐसी जगह से सड़क पार करने लगे जहां रेलिंग की ऊंचाई कम है।सदन ने एफओबी फर्म को बुलाकर अनुबंध में लिफ्ट या एस्केलेटर लगाने का प्रावधान करने के निर्देश दिए हैं। कई दिन से अवकाश चल रहे हैं। जल्द ही सदन के निर्णय पर अमल कर अनुबंध में लिफ्ट या एस्केलेटर का प्रावधान कराया जाएगा। तब तक एफओबी पर विज्ञापन नहीं लगने दिए जाएंगे। - डीके सिन्हा, अपर नगर आयुक्त