‘अगर इंसान के हौसले बुलंद हाें तो बड़े से बड़ा काम करने में भी परेशानी नहीं आती। लक्ष्य निर्धारित करो और उसे पाने में जुट जाओ। परेशानियों का डटकर मुकाबला करो। देखना एक दिन मंजिल आपके कदमों में होगी।’ यह कहना था पर्वतारोही तूलिका रानी का। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा नेहरू वर्ल्ड स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में तूलिका ने स्टूडेंट्स को स्ट्रेस फ्री रहने के टिप्स भी दिए।
पहाड़ों से प्यार हर किसी को होता है, लेकिन ऐसे लोग कम ही होते हैं, जो इन पर्वतों की ऊंची चोटियों को फतह करने का जुनून रखते हैं। तूलिका रानी उन्हीं में से एक हैं। ‘मानसिक और शारीरिक तनाव का प्रबंधन’ विषय पर नेहरू वर्ल्ड स्कूल में तूलिका रानी का गेस्ट लेक्चर आयोजित किया गया। एक्स. स्क्वाड्रन लीडर तूलिका रानी ने बताया कि जीवन में बहुत बाधाएं आती हैं, लेकिन उनका सामना करना चाहिए। अपने अंदर आत्मविश्वास पैदा किया जाए तो बड़ी से बड़ी बाधा भी दूर हो जाती है।
उन्होंने बताया कि जब उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया था, तब भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पैरेंट्स का पूरा सपोर्ट मिला और 2012 में एवरेस्ट फतह की। माउंट एवरेस्ट के फतह की कहानी को तूलिका ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिखाया। उन्होंने कहा कि तनाव भी जीवन का एक हिस्सा है। उसे कम करने की कोशिश होनी चाहिए। व्यक्ति तभी सफल बनता है, जब वह हर मुश्किल को पार करता है।
असफलता से हार मानकर बैठने से सफलता नहीं मिलती। उन्होंने कभी सोचा भी न था कि पर्वतारोही बनूंगी। 2009 में पर्वतारोहण की ट्रेनिंग शुरू की। फिजिकल और मेंटल एक्सरसाइज की। 2011 में एयरफोर्स ने एक महिला दल बनाया, जिसे माउंट एवरेस्ट को फतह करना था। काफी मेहनत के बाद 2012 में अपनी मंजिल पा ही ली। हालांकि बाद में तीन माह तक अस्पताल में भर्ती रही। बर्फ में गलने के कारण एक पांव की उंगली का अगला हिस्सा डॉक्टरों को काटना पड़ा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी।
एवरेस्ट के बाद ईरान और अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची (5895 मीटर) किलिमंजारो चोटी को फतह किया। अब अगला लक्ष्य 8201 मीटर ऊंची चोटी ‘चाऊ ओयू’ है, जिसकी तैयारी चल रही है। कार्यक्रम में नेहरू वर्ल्ड स्कूल के डायरेक्टर अरुणाभ सिंह समेत कई टीचर्स मौजूद थे।
स्टूडेंट्स के सवाल, तूलिका के जवाब
वेदांगनी, प्रभात, मृत्युंजय रघुवंशी, अर्शिया, मीका, अदिति और मंगलम शर्मा ने पूछा कि फैमिली का कितना सपोर्ट मिला, रोल मॉडल कौन है, पैरेंट्स की इच्छाएं महत्वपूर्ण हैं या अपनी। तूलिका का जवाब था, हर पैरेंट्स के अपने सपने होते हैं। यदि स्टूडेंट्स अपने सपनों को उन्हें बताएं तो वह कभी मना नहीं करेंगे। फैमिली सपोर्ट के बिना आगे बढ़ना मुश्किल होता है।
ऑटोग्राफ लिया और बोले-थैंक्यू मैडम
प्रोग्राम के बाद स्टूडेंट्स ने तूलिका को घेर लिया और उनसे बात की। तूलिका ने सभी को ऑटोग्राफ दिया। ऑटोग्राफ पाकर स्टूडेंट्स ने कहा-थैंक्यू मैडम।
- तूलिका का वीडियो देखें facebook.com/amarujalafoundation, foundation.amarujala.com