गाजियाबाद। शहर के नौ इलाकों में अब 112 वर्गमीटर जमीन पर तीन व चार मंजिला भवन बनाने की इजाजत नहीं मिलेगी। शासन ने जीडीए को नई बायलॉज (उपविधि) भेजी है, जिसके अनुसार अब 150 वर्गमीटर भूखंड पर ही तीन मंजिल भवन बनाया जा सकेगा।
जबकि चार मंजिल के लिए तीन सौ वर्गमीटर का भूखंड होना जरूरी है। इस बायलॉज से उन बिल्डरों की जान सांसत में फंस गई है, जिन्होंने 112 वर्गमीटर जमीन तीन-चार मंजिला भवन बनाने के लिए ले रखी है।
जीडीए के सीएटीपी इश्तियाक अहमद ने मंगलवार को बताया कि जीडीए की बोर्ड मीटिंग में नए बायलॉज को पास कर दिया जाएगा। यह मीटिंग जुलाई में संभावित है। उन्होंने बताया कि शहर के जिन नौ इलाकों में 112 वर्गमीटर भूखंड पर तीन-चार मंजिला भवन बनाने की इजाजत दी गई थी, नए नियम भी सिर्फ इन्हीं इलाकों के लिए होंगे।
ये इलाके हैं-इंदिरापुरम, वैशाली, कौशांबी, शालीमार गार्डन, इंद्रप्रस्थ, राजेंद्र नगर, लाजपत नगर, प्रताप विहार और स्वर्णजयंतीपुरम। सीएटीपी ने बताया कि जो बिक्री की मंशा से तीन व चार मंजिला भवन बनाने की अनुमति लेंगे उनसे विकास शुल्क वसूला जाएगा।
जो बडे़ परिवार के साथ रहने के लिए भवन बनाएंगे, उनसे यह शुल्क नहीं लिया जाएगा लेकिन उन्हें पार्किंग के लिए सिल्ट फ्लोर की इजाजत नहीं मिलेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे भवनों की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर होगी।
इन भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। अग्निशमन विभाग से अनापत्ति लेना अनिवार्य होगा। बढ़ती आबादी को देखकर बनाई बायलॉज: शासन ने बढ़ती आबादी के चलते कम जमीन पर अधिक निर्माण की मंशा से ‘भवन निर्माण एवं विकास उपविधि-2008’ में संशोधन किया है।
आम जनता को होगी सहूलियत
जीडीए का कहना है कि 112 वर्गमीटर पर चार मंजिला भवनों के निर्माण से उस इलाके में नाली, सीवर, जाम आदि की समस्याएं उत्पन्न हो गई थीं। इलाका संकीर्ण हो गया था। अब भूखंड का एरिया बढा देने से इन समस्याओं से बचा जा सकेगा।
पहले 30 फीट चौडी सडक किनारे चार मंजिल भवन निर्माण की इजाजत थी, अब चार मंजिल के लिए 40 फीट चौडी सडक होनी चाहिए। अब यह ख्याल रखा जाएगा कि भवन बनने से उस इलाके के लोगों की सुविधाओं में कोई खलल तो नहीं पडेगी। जहां सघन आबादी पहले से होगी वहां ऐसे भवनों के निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी। अब ये भवन वहीं बन पाएंगे जो इलाका खुला होगा।