क्या आपको पता है कि शहर में आपके कान मानक से 20.60 डेसिबल अधिक शोर झेल रहे हैं जबकि पीक आवर्स में 35 डेसिबल अधिक शोर आपके कानों तक पहुंचता है। इतना शोर आपके कानों के लिए घातक है।
यह शोर आपको सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस का मरीज बना रहा है यानी आप बहरेपन की बीमारी की जद में आ रहे हैं। इस वक्त गाजियाबाद का ध्वनि प्रदूषण 75.60 डेसिबल है, जो 55 डेसिबल के स्वीकृत ध्वनि प्रदूषण से 20.60 डेसिबल ज्यादा है।
हैरानी की बात ये है कि गाजियाबाद में ध्वनि प्रदूषण की नियमित जांच नहीं की जाती, जिसके चलते ध्वनि प्रदूषण का कोई रियल टाइम डाटा ही उपलब्ध नहीं है। दिवाली के दौरान ही जांच होती है।
एक अनुमान के मुताबिक पीक आवर्स में ध्वनि प्रदूषण 90 डेसिबल तक पहुंच जाता है। जानकारों का मानना है कि आम जनता चाह ले तो शहर में ध्वनि प्रदूषण का लेवल घट सकता है लेकिन लोग हॉर्न का इस्तेमाल अनावश्यक भी करते हैं। वहीं बाजारों में लोग जेनरेटर रोड किनारे रख देते हैं। इससे भी खासा शोर होता है। शहर के शोर-शराबे के लिए लोग ज्यादा जिम्मेवार हैं।
ईएनटी स्पेशलिस्ट की मानें तो ये खतरे की घंटी है। हर वर्ष 10 हजार लोग हियरिंग लॉस की चपेट में आते हैं। ईएनटी स्पेशलिस्ट एंड हेड सर्जन डा. बीपी त्यागी ने बताया कि कान के विभिन्न रोगों से ग्रस्त हर 100 मरीजों में से 20 सेंसरी न्यूरल हियरिंग लॉस से ग्रस्त होते हैं।
इतना अधिक शोर मस्तिष्क की आठवीं क्रेनिएल नर्व पर असर डालता है और समय बीतने के साथ कानों तक पहुंचने वाली आवाज की गुणवत्ता गिरती जाती है। ईएनटी स्पेशलिस्ट डा. संदीप पंवार ने कहा कि शहर का ध्वनि प्रदूषण इस बीमारी को पैदा करने का एक प्रमुख कारण है।
प्रेशर हॉर्न की बिक्री पर नहीं है कोई रोक
मन होने पर पुलिस वाहनों से प्रेशर हॉर्न हटाने की कार्रवाई करती है लेकिन इसका जड़ से इलाज नहीं किया जाता। प्रेशर हॉर्न बेचने वाले दुकानदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है और न ही वहां से प्रेशर हॉर्न जब्त किए जाते हैं।
हॉट सिटी में करीब दो सौ से अधिक दुकानें हैं जहां धड़ल्ले से प्रेशर हार्न बेचे जा रहे हैं। इसकी बिक्री पर कोई प्रतिबंध न लगाने का ही यह नतीजा है कि दो पहिये वाहन चालक भी अब प्रेशर हॉर्न बजाने लगे हैं। हाल के दिनों में ऐसे प्रेशर हॉर्न बिकने लगे हैं, जिनकी आवाज रोड पर चल रहे लोगों को डरा देती है। ऐसे में दुर्घटना का भी खतरा बना रहता है।
अफसर बोले-ध्वनि प्रदूषण में आई कमी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक पारसनाथ का कहना है कि ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए प्रेशर हॉर्न पर पाबंदी और साउंड लेस जेनरेटर लगाने पर जोर दिया जा रहा है। लोगों से अपील की जाती है कि अनावश्यक हॉर्न का इस्तेमाल न करें। उन्होंने दावा किया कि बीते वर्षों के मुकाबले ध्वनि प्रदूषण में कमी आई है।
एआरटीओ प्रवर्तन शेर सिंह ने कहा कि प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल अवैध है और इसके खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाया जाता है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीने में प्रेशर हॉर्न का इस्तेमाल करने वाले 671 वाहनों का चालान काटा गया और इनसे 6 लाख 27 हजार रुपये जुर्माना वसूला गया।
चार दिनों पहले कौशांबी में आयोजित एक बैठक में मेरठ जोन के आईजी ने प्रेशर हॉर्न के खिलाफ अभियान चलाने का आदेश दिया था। निकट भविष्य में यह अभियान चलाया जाएगा। बता दें कि प्रेशर हॉर्न के इस्तेमाल पर कम से कम एक हजार रुपये जुर्माना है।