अगर शहर के मंदिरों में आपको स्वाइप मशीन या पेटीएम का बारकोड लगा दिख जाए तो हैरान होने की जरूरत नहीं है। ये नोटबंदी का इफेक्ट है। मंदिरों के चढ़ावे में आई कमी को देखते हुए मंदिर भी कैशलेस होने वाले हैं।
शहर के प्रमुख मंदिर अब स्वाइप मशीन और पेटीएम के जरिए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते नजर आएंगे। शहर के प्रमुख पांच मंदिरों में से प्रत्येक में जहां रोज 50 हजार से एक लाख रुपये तक चढ़ावा आता था, नोट बंदी के बाद से चढ़ावा 10 से 20 हजार रोज तक गिर गया है।
मंदिर प्रबंधकों की मानें तो रोज के चढ़ावे में 80 फीसदी तक कमी आ गई है। दूधेश्वरनाथ मंदिर, डासना देवी मंदिर, इस्कॅान मंदिर, स्वयंभू मंदिर सहित अन्य कई मंदिरों का नोट बंदी के बाद एक सा हाल है।
डासना प्राचीन देवी मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने बताया कि अब मंदिर में चढ़ावा नहीं के बराबर हो गया है। हाल ही में मंदिर में मूर्ति स्थापना के भव्य कार्यक्रम के बाद जब दानपात्र खोला गया तो सिर्फ पांच हजार रुपये का ही चढ़ावा मिला, जबकि ऐसे आयोजनों में एक लाख रुपये से अधिक का चढ़ावा आ जाता था।
उधर, दूधेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार का चढ़ावा दस हजार रुपये पर आ गया है जबकि ये 25 से 50 हजार तक हो जाता था।
दूधेश्वरनाथ मंदिर में लगेगी स्वाइप मशीन
दूधेश्वरनाथ मंदिर में अब दान के लिए कैशलेस व्यवस्था होने जा रही है। दूधेश्वरनाथ मंदिर के महंत नारायण गिरि ने बताया कि जल्द ही मंदिर में स्वाइप मशीन लगाई जाएगी, इससे पारदर्शिता भी बनी रहेगी और भक्तों को असुविधा भी नहीं होगी। इसके साथ ही पेटीएम से भी दान दिया जा सकेगा।