जेल से छूटकर दो दिन पूर्व देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव अड़ौली निवासी टीकम सिंह उर्फ टिंकू पुत्र विजयपाल अपने घर पहुंचा। लेकिन, उसका घर तो अब बिक चुका था। उसके मां-पिता और दो छोटे भाई एक झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं। पिता विजयपाल ने बताया कि वर्ष 2005 में गांव निवासी जगदीश की हत्या हुई थी। जिस मामले में खुद विजयपाल, उनका बड़ा पुत्र रोहताश और छोटा पुत्र टीकम जेल गए थे।
टीकम की उम्र उस समय 15 साल की थी। कुछ समय बाद विजयपाल जमानत पर छूट गए। लेकिन, उनके पुत्रों की जमानत नहीं मिल सकी थी। वर्ष 2008 में सभी को आजीवन कारावास हुआ था। जिसके बाद उनके लोगों ने धोखाधड़ी कर उनका मकान भी बेच दिया। अब वह एक झोपड़ी में रह रहे हैं। टीकम शुक्रवार को अपनी रिश्तेदारी में गया हुआ था।
पिता की हुई मौत, सात बहनों की भी हो गई शादी
खुर्जा नगर कोतवाली क्षेत्र के गांव किला मेवई निवासी सोनू उर्फ गजेंद्र पुत्र जज सिंह जेल से छूटकर बुधवार देर रात अपने गांव पहुंचा था। उसने बताया कि वर्ष 2005 में आवेश में आकर उसने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। उस समय उसकी उम्र करीब 17 वर्ष थी। वर्ष 2007-08 में उसे प्रकरण में न्यायालय ने आजीवन कारावास सुनाया था। तब से वह जेल में था। परिवार में उसके माता-पिता, सात बहने और एक भाई था, जो कि मानसिक रूप से दिव्यांग है। सोनू ही परिवार का एक मात्र सहारा था।
करीब चार वर्ष पूर्व उसके पिता की इसी टेंशन में मौत हो गई थी। लेकिन, वह पिता के अंतिम संस्कार में भी शामिल नहीं हो सका। साथ ही इस बीच उसकी सातों बहनों की भी शादी हो चुकी है। करीब तीन वर्ष पूर्व उसके भतीजे का निधन हो गया था। वर्तमान में उसकी जमीन जायदाद सब बिक चुका है। सोनू ने बताया कि उसे अफसोस है कि आवेश में आकर उसने जो किया उससे उसका परिवार ही उजड़ गया। खुशियां छीन गईं।
जहांगीराबाद थाना क्षेत्र के गांव बांसुरी निवासी तेजू पुत्र भंवर सिंह वर्ष 1998 में गांव निवासी नवाज सिंह की हत्या के मामले में जेल गया था। उस समय उसकी उम्र करीब 16 वर्ष थी। कुछ समय बाद वह जमानत पर जेल से छूटा तो परिजनों ने उसका विवाह करा दिया था। लेकिन, वर्ष 2006 में उसके पिता की मृत्यु हो गई। इसके बाद वर्ष 2009 में उक्त प्रकरण में उसे आजीवन कारावास सुनाया गया था। कुछ रिश्तेदारों ने उसकी पत्नी की आर्थिक मदद की।
किसी भी अपराधी को घटना के समय किशोर अपचारी पाए जाने पर मुकदमे के विचारण के दौरान अंतिम निर्णय होने तक किशोर अपचारी घोषित होने पर तीन वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।- संतोष कुमार राघव, अधिवक्ता