जनपद न्यायालय में 29 अक्तूबर को हुए लाठीचार्ज के विरोध में चार नवंबर से चली आ रही हड़ताल 37 दिन बाद समाप्त हो गई। बार अध्यक्ष दीपक शर्मा ने वीडियो जारी कर बताया कि 22 वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार से मुलाकात की। दोनों पक्षों की वार्ता में एक-दूसरे के गिला शिकवे दूर हुए। इसके बाद जनपद न्यायाधीश ने आश्वासन दिया कि वकीलों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। इसके बाद बार ने हड़ताल समाप्त की घोषणा की। अब बृहस्पतिवार से अधिवक्ता काम पर लौटेंगे।
बार सचिव अमित नेहरा ने बताया कि बुधवार दोपहर तीन बजे जनपद न्यायाधीश और अन्य न्यायिक अधिकारियों की उपस्थिति में वकीलों के साथ हुई वार्ता में न्यायिक अधिकारियों ने खेद प्रकट किया है। आश्वासन दिया है कि इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति को पूरी तरह से रोका जाएगा। इसलिए चार नवंबर से शुरू हुए आंदोलन को समाप्त करते हुए 12 दिसंबर से सुचारू रूप से न्यायिक कार्य करेंगे। सचिव ने बताया कि हड़ताल के कारण अधिवक्ता और वादकारी को किसी भी पत्रावाली की सुनवाई की तिथि के बारे में जानकारी नहीं है, इसलिए 12 व 13 दिसंबर को किसी भी पत्रावली पर कोई प्रतिकूल प्रविष्टि जारी नहीं की जाएगी।
हड़ताल से मुकदमे हुए प्रभावित
चार नवंबर से लगातार चल रही थी हड़ताल
29 अक्तूबर को जनपद न्यायालय में एक केस के मामले में अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई को लेकर पूर्व बार अध्यक्ष नाहर सिंह यादव और जनपद न्यायाधीश के बीच हुई कहासुनी के दौरान सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने अधिवक्ताओं को न्यायालय कक्ष खाली करने के लिए कहा था। अधिवक्ताओं ने पुलिस की बात नहीं मानी। इसके बाद पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए वकीलों पर लाठी चार्ज कर दिया था। इसके विरोध में वकील चार नवंबर से धरना देकर प्रदर्शन कर रहे थे। वकीलों की मांग थी कि जिला जज को निलंबित किया जाए और लाठी चार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
यह थी मांगे