गाजियाबाद। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस पर इंदिरापुरम में बनाए गए 74 एमएलडी क्षमता के एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के संचालन पर अब संकट मंडराने लगा है। सालाना करीब पांच करोड़ रुपये मेंटेनेंस खर्च को देख अब कार्यदायी संस्था जल निगम ने इसका संचालन करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अब वह इस एसटीपी को नगर निगम के हैंडओवर करना चाहता है, लेकिन नगर निगम ने भी इसे लेने से इंकार कर दिया है। ऐसे में अब जल निगम ने एसटीपी का संचालन बंद करने की चेतावनी दी है। एसटीपी बंद हुआ तो साहिबाबाद ड्रेन का गंदा पानी फिर बिना शोधित किए हिंडन नदी में जाना शुरू हो जाएगा।
बीते बुधवार को यह मसला नगर निगम कार्यकारिणी समिति की बैठक में भी गूंजा और करीब आधा घंटा इसी मसले पर चर्चा हुई। जल निगम के अधिशासी अभियंता मोहम्मद ताहिर ने एसटीपी के संचालन पर खर्च किया जा चुके 1.5 करोड़ रुपये की डिमांड की और निगम से इसे टेकओवर करने का प्रस्ताव रखा।
नगर आयुक्त अब्दुल समद ने निगम की वित्तीय स्थिति ठीक न होने की वजह से इसे टेकओवर करने से इंकार कर दिया। उनका कहना था कि एसटीपी में साहिबाबाद ड्रेन के जरिए सिर्फ नगर निगम ही नहीं, जीडीए और आवास विकास की कालोनियों का पानी भी पहुंच रहा है।
ऐसे में जीडीए व आवास विकास परिषद मेंटेनेंस कॉस्ट में हिस्सेदारी करें तो निगम इस पर विचार कर सकता है। जल निगम ने अब मामला लखनऊ तक पहुंचा दिया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इसमें प्रमुख सचिव स्तर पर बैठक कर तीनों विभागों के अधिकारियों में सहमति बनाई जा सकती है।