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मोबाइल, मौत और इंसाफ: कीर्ति के कातिल के अंत की कहानी, जितेंद्र पर दर्ज थे 13 केस और सिर पर था 25 हजार का इनाम

Tue, 31 Oct 2023 07:10 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजियाबाद

सार

जिसे डोली में विदा करना था, उसकी अर्थी उठाई है। भगवान ऐसा किसी के साथ न हो... यह दर्द कीर्ति के पिता रविंद्र सिंह का है। बेटी की मौत से वह बुरी तरह टूट गए हैं। 
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कीर्ति का कातिल जितेंद्र एनकाउंटर में ढेर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोबाइल फोन लूटने के लिए इंजीनियरिंग की छात्रा कीर्ति (19) की जान लेने के आरोपी गैंगस्टर जितेंद्र उर्फ जीतू (29) को पुलिस ने पीड़िता की मौत के नौ घंटे बाद की मसूरी नहर पटरी पर मुठभेड़ में मार गिराया। उस पर 13 केस दर्ज थे। छात्रा की हत्या के मामले में उस पर 25 हजार का इनाम घोषित किया गया था।

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घेराबंदी होते ही बदमाशों ने की फायरिंग
डीसीपी ग्रामीण विवेक यादव ने बताया कि रविवार की रात 10 बजे मुरादनगर में सीकरी कलां निवासी यतेंद्र वशिष्ट से बुलेट बाइक और 5100 रुपये लूट लिए जाने की सूचना पर पुलिस चेकिंग कर रही थी। नहर पटरी पर बुलेट बाइक पर दो बदमाश नजर आए। घेराबंदी होते ही बदमाशों की ओर से 10 राउंड फायर किए गए। पुलिस ने जवाब में सात गोली चलाईं। इनमें से तीन गोली एक बदमाश को लगीं। दो सीने और एक पैर में। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टर ने उसे मृत बताया। उसका साथी भाग निकला। मृतक बदमाश की पहचान इंद्रगढ़ी के मिशलगढ़ी निवासी जितेंद्र उर्फ जीतू के रूप में हुई। बदमाशों की गोली लगने से दरोगा भानू प्रकाश घायल हुए हैं।

गिरने से टूट गई थी कीर्ति के सिर की हड्डी
जितेंद्र ने 27 अक्तूबर की शाम साढ़े चार बजे एबीईएस कॉलेज में बीटेक प्रथम वर्ष की छात्रा कीर्ति से मोबाइल फोन लूटा था। कीर्ति सहेली दीक्षा के साथ ऑटो से अपने घर हापुड़ के पन्नापुरी जा रही थी। उसके साथ वारदात एनएच-9 पर मसूरी में हुई थी। जितेंद्र साथी बलवीर के साथ बाइक पर आटो का पीछे करते आया था। कीर्ति ने मोबाइल नहीं छोड़ा तो उसे बाहर की ओर खींचा था। सड़क पर गिर जाने से उसके सिर की हड्डी टूट गई थी। उपचार के दौरान रविवार की शाम साढ़े सात बजे उसने दम तोड़ दिया था। बलवीर को पुलिस ने शनिवार को ही जेल भेज दिया था। कीर्ति की मौत के नौ घंटे बाद मुख्य आरोपी जितेंद्र मुठभेड़ में मारा गया।

जिसे डोली में विदा करना था, उसकी अर्थी उठाई है
जिसे डोली में विदा करना था, उसकी अर्थी उठाई है। भगवान ऐसा किसी के साथ न हो... यह दर्द कीर्ति के पिता रविंद्र सिंह का है। बेटी की मौत से वह बुरी तरह टूट गए हैं। परिवार के लोगों ने बताया कि कीर्ति शुरू से ही पढ़ाई में होनहार थी। वह सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनकर अपने व परिवार के सपनों को साकार करना चाहती थी। हाल ही में उसकी जेईई एडवांस की परीक्षा में उसका लखनऊ के सरकारी कॉलेज के लिए चयन हो गया था, लेकिन कीर्ति पास रहे, यह सोचकर उसका प्रवेश गाजियाबाद के एबीईएस कालेज में बीटेक कंप्यूटर साइंस स्ट्रीम में कराया। कीर्ति सिंह ने यूपी बोर्ड के स्कूल टैगार शिक्षा सदन से कक्षा छह से 12वीं तक की परीक्षा पास की। हमेशा उसके नंबर 80 प्रतिशत से अधिक रहे और कभी पढ़ाई के मामले में उसे कहने की आवश्यकता नहीं पड़ी।

मां के करीब थी कीर्ति
पिता रविंद्र सिंह ने बताया कि शुरू से ही उसका सपना उच्च कोटि की सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना था, इसके लिए उसने अपना लक्ष्य बना रखा था। कक्षा 12 पास करने के बाद उसने इंजीनियरिंग के लिए छह माह की तैयारी करते हुए प्रवेश परीक्षा दी। उससे कहा था कि हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर ले, लेकिन मां से अधिक लगाव होने के कारण उसने घर से कॉलेज आना जाना चुना। दुर्भाग्य से 20 दिन बाद ही यह घटना हो गई।

दफन हुआ कीर्ति का सपना
कीर्ति की मौत के बाद जहां उसका सपना भी दफन हो गया, वहीं परिवार की उम्मीदें भी खत्म हो गई। पिता का कहना था कि उनकी ख्वाहिश थी कि बेटी को कामयाब कर धूमधाम से शादी कर डोली में बिठाकर विदा करे। भाई अंकित भी ने भी पॉलीटेक्निक की है और इंजीनियरिंग के लिए वह भी तैयारी कर रहा है।

शोक में स्कूल की छुट्टी
जैसे ही कीर्ति की मौत की खबर टैगोर शिक्षा सदन के शिक्षक शिक्षिकाओं ने अखबार में पढ़ी तो स्कूल में भी मातम पसर गया। सुबह सब स्कूल तो पहुंचे, लेकिन श्रद्धांजलि के बाद सभी की छुट्टी कर दी गई।

हमारी बेटी ने कुर्बानी दी, भविष्य में इस तरह न जाए किसी की जान
कीर्ति के पिता रविंद्र सिंह पूरी तरह से टूट चुके हैं। उनके आंसू थमने के नाम नहीं ले रहे हैं। बेटी का अंतिम संस्कार करके लौटने पर रुंधे गले से बोले, हमारी बेटी ने लुटेरों से लड़ते हुए कुर्बानी दी है। आगे ऐसे इंतजाम किए जाए जिससे भविष्य में किसी और बच्ची की जान इस तरह से न जाए। आरोपी को मुठभेड़ में मार गिराए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि हत्यारे के साथ सही सुलूक हुआ। दूसरे आरोपी को भी सही सजा दिलवाई जाए।

रेलवे में लोको पॉयलट रविंद्र सिंह की पोस्टिंग हरियाणा के जींद में है। उन्होंने बताया कि बेटी के आने जाने के दौरान इतनी फिक्र रहती थी कि दिन में करीब 10 बार फोन कर हाल चाल पूछते रहते थे। कॉलेज आने के बाद जब तक वह घर नहीं पहुंच जाती थी उन्हें चैन नहीं आता था। उन्होंने कहा कि छात्राओं का सफर सुरक्षित नहीं है। इन्हीं कमियों के कारण उनकी बेटी कुर्बान हो गई,। कॉलेज प्रशासन को खुद की बसों की व्यवस्था करनी चाहिए। सड़कों पर बेटियों की सुरक्षा के प्रबंध किए जाएं। ऐसे अपराधियों पर सख्ती हो ताकि ऐसे लोगों में दहशत बने।
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नशे के लिए बना अपराधी
जितेंद्र के परिजनों ने बताया कि उसने नशे के लिए अपराध की राह पकड़ी। उसे वेल्डिंग का काम कराया, लेकिन इसमें उसका मन नहीं लगा। इसके बाद रंगाई-पुताई का काम किया, लेकिन कुछ ही दिन में छोड़ दिया। इसके बाद ऑटो चलाया लेकिन उसे रास नहीं आया। उसे पहली बार 2016 में तमंचे के साथ पकड़ा गया था। दो बार जेल गया लेकिन अपराध करना नहीं छोड़ा। उस पर आर्म्स एक्ट, आबकारी एक्ट, लूट, जानलेवा हमला और हत्या के दर्ज थे।
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