गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में जहां प्रतिदिन 20 से 25 मोतियाबिंद के ऑपरेशन हो रहे हैं, वहीं एक सामाजिक सच भी उभरकर सामने आ रहा है। बुजुर्ग माता-पिता को अस्पताल लाने और उनकी देखभाल करने में बेटियां आगे दिख रही हैं। एमएमजी अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के डॉक्टरों से लेकर ऑपरेशन थिएटर के तकनीशियन तक इस बदलाव को महसूस कर रहे हैं।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कुमार बताते हैं कि अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने वाले अधिकांश बुजुर्गों के साथ उनकी बेटियां होती हैं। उनके अनुसार, बदलते सामाजिक ढांचे में बेटियां भावनात्मक और नैतिक दोनों स्तरों पर आगे बढ़कर माता-पिता का सहारा बन रही हैं। बेटियों की यह भूमिका समाज में नई संवेदनशीलता पैदा कर रही है।
80 फीसदी बुजुर्गों को बेटियां ला रहीं अस्पताल : ऑपरेशन थिएटर के तकनीशियन विनोद कुमार ने बताया, वह कई वर्षों से देख रहे हैं कि लगभग 80 फीसदी मामलों में बेटियां ही बुजुर्ग माता-पिता को लेकर आती हैं। कारण पूछने पर महिलाएं समाज की उन परतों को सामने रखती हैं, जो आमतौर पर सामने नहीं आतीं। कहीं पत्नी के दबाव में बेटे माता-पिता के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते तो कहीं समय की कमी और पारिवारिक तनाव कारण बनता है। ऐसे में बेटियां ससुराल के साथ मायके की जिम्मेदारियां भी निभाती हैं।