मसूरी/गाजियाबाद। दो माह पहले समयपुर गांव से लापता हुए 10 वर्षीय लविश का नूरपुर गांव के जंगल में कंकाल मिला है। परिजनों ने खून से सनी टी-शर्ट और अंडरवियर से उसकी पहचान की। मासूम के बड़े भाई ने हत्या का आरोप लगाया है। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल की जांच कर साक्ष्य एकत्र किए हैं।
डीसीपी सुरेंद्र नाथ तिवारी ने बताया कि मसूरी थाना क्षेत्र के गांव समयपुर निवासी सागर ने चार नवंबर 2025 को अपने छोटे भाई लविश की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। वह तीन नवंबर से लापता था। सोमवार सुबह नूरपुर के जंगल में खेत में सिंचाई कर रहे किसान ने झाड़ियों में नर कंकाल देखा तो पुलिस को सूचना दी।
लविश की मां सीमा ने कंकाल के पास मिले कपड़ों से उसकी पहचान बेटे के रूप में की। सागर ने बताया कि लविश नूरपुर स्थित सुंदर मेमोरियल सेकंडरी हाईस्कूल में कक्षा दो में पढ़ता था।
डीसीपी ने बताया कि कंकाल को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। इसकी रिपोर्ट से मौत के कारणों का पता चलेगा। आवश्यकता पड़ने पर डीएनए टेस्ट भी कराया जाएगा।
लापता होने से पहले बच्चों से हुआ था झगड़ा
सागर ने बताया कि वह राज्य कर विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। वर्तमान में अलीगढ़ में तैनात हैं। उनके पिता की आठ वर्ष पहले कैंसर के चलते मौत हो चुकी है। घर में मां सीमा के अलावा चार बहनें हैं। इनमें दो शादीशुदा और दो शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। बताया कि लविश के लापता होने से पहले इस्सेपुर गांव के बच्चों से उसका झगड़ा हुआ था। हालांकि, दोनों पक्षों में सहमति के बाद मामला शांत हो गया था।
खाना छोड़कर घर से निकला था लाडला
मां सीमा ने बताया कि चार बेटियों और दो बेटों में लविश सबसे छोटा था। घटना वाले दिन दोपहर में उन्होंने लविश की जिद पर खाना बनाया। इसी बीच वह घर से बाहर चला गया। छोटी बहन बुलाने के लिए घर से निकली तो वह नूरपुर की तरफ कोल्हू पर जाता दिखाई पड़ा। इसके बाद वह नहीं लौटा। सीमा ने बताया कि पति की मौत के बाद छोटे बेटे को हर वक्त आंखों के सामने रखती थीं, लेकिन क्या पता था कि वह उसे घर से जाते समय आखिरी बार देख रही हैं।
फाईल फोटो लविश कुमार