गाजियाबाद। लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की मौत ने भले ही पूरे देश को झकझोर दिया हो, लेकिन शहर में कोचिंग संचालकों की तंद्रा नहीं टूटी है। मंगलवार को कई कोचिंग सेंटरों की पड़ताल में सामने आया कि आग से बचाव के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की जा रही है। कहीं दीवारों पर एक्सपायर अग्निशमन यंत्र टंगे मिले तो कहीं रेत की बाल्टियां खाली पड़ी मिलीं। कई इमारतों में पहली और दूसरी मंजिल तक पहुंचने के लिए केवल दो फीट चौड़ी सीढ़ियां हैं, जबकि कुछ स्थानों पर गैलरी इतनी संकरी है कि एक समय में केवल एक छात्र ही निकल सकता है। चुनिंदा सेंटरों को छोड़ दें तो अधिकांश जगह आपात स्थिति के लिए दूसरा निकास मार्ग मौजूद नहीं मिला। ऐसी स्थिति में यदि आग लग जाए तो दर्जनों छात्रों का सुरक्षित बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है। अधिकांश सेंटर संचालकों के पास वैध फायर एनओसी भी नहीं है। सवाल यह है कि क्या यहां भी प्रशासन किसी त्रासदी का इंतजार कर रहा है या सख्ती से कार्रवाई होगी।
सीन-1 : दोपहर 1:00 बजे : लाल बहादुर शास्त्री कोचिंग सेंटर
टेबल के नीचे रखा मिला एक्सपायर अग्निशमन यंत्र
राकेश मार्ग स्थित इस कोचिंग सेंटर में एक शिफ्ट में आधा दर्जन से अधिक छात्र पढ़ने के लिए आते हैं। यहां छात्रों को पहुंचने के लिए करीब दो से ढाई फीट चौड़ी गैलरी से होकर गुजरना पड़ता है। प्रवेश द्वार के पास अग्निशमन यंत्र टेबल के नीचे रखा मिला, लेकिन उसकी वैधता अवधि दो साल पहले 2024 में ही समाप्त हो चुकी थी। यानी आपात स्थिति में जिस उपकरण से छात्रों की सुरक्षा होनी चाहिए, उसकी उपयोगिता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। कर्मचारियों से पूछने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। संचालक श्रीकांत पाल का कहना है कि हमारे यहां प्रवेश के दो द्वार हैं और सिलिंडर की रिफिलिंग करवा दी जाएगी।
सीन-2 : दोपहर 1:30 बजे : चंद्रशेखर आजाद ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट
आग बुझाने की बाल्टियां मौजूद, लेकिन रेत गायब
राकेश मार्ग पर ही एक भवन की दूसरी मंजिल पर संचालित इस इंस्टीट्यूट में आग से बचाव के लिए रखी गई रेत की बाल्टियां पूरी तरह खाली मिलीं। कुछ में धूल जमी हुई थी, जो सुरक्षा इंतजामों की वास्तविक स्थिति बयां कर रही थीं।हालांकि, सेंटर में आग बुझाने के लिए दो सिलिंडर मौजूद थे, लेकिन सीढ़ियां मात्र दो से तीन फीट चौड़ी हैं और आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए दूसरा रास्ता नहीं मिला। संचालक सुनील का कहना है कि सफाई कर्मचारी ने बाल्टियां खाली कर दी थीं, जिन्हें दोबारा भरवा दिया जाएगा।
सीन-3 : दोपहर 1:45 बजे : राजीव क्लासेज
तारों का जाल और सिलिंडरों पर ओवरराइटिंग
यह कोचिंग भी राकेश मार्ग पर एक भवन की दूसरी मंजिल पर संचालित होती है। यहां तक पहुंचने के लिए करीब दो फीट चौड़ी संकरी सीढ़ियां हैं। बैच बदलने के दौरान यहां छात्रों की भीड़ लग जाती है। ऐसे में आग या धुआं फैलने की स्थिति में यही रास्ता सबसे बड़ा जोखिम बन सकता है। जांच के दौरान प्रवेश द्वार के पास बिजली के तारों का जाल भी फैला मिला, जिससे शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी रहती है। यहां मौजूद तीन अग्निशमन सिलिंडरों की वैधता तिथि पर काले पेन से ओवरराइटिंग कर वर्ष 2027 लिखा गया था। संचालक राजीव ने बताया कि सिलिंडर भरते समय कर्मचारी ने गलत तिथि लिख दी थी। ओवरराइटिंग का कारण उन्होंने उसे ठीक करना बताया। तारों के संबंध में उनका कहना है कि मकान मालिक की ओर से निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिस कारण तार फैले हुए हैं।
सीन-4 : दोपहर 2:00 बजे : कॅरिअर स्टडी सर्कल
छह साल पहले खत्म हुई वैधता, सुरक्षा इंतजाम नदारद
आंबेडकर रोड स्थित इस शिक्षण संस्थान में छात्र-छात्राएं पढ़ाई करते मिले, लेकिन यहां न तो फायर अलार्म दिखाई दिया और न ही आपदा के समय बाहर निकलने के दिशा-निर्देश। अधिकांश छात्रों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके क्लास में रखे अग्निशमन सिलिंडरों की वैधता छह साल पहले यानी 2020 में ही समाप्त हो चुकी है। संचालक केएस पंवार का कहना है कि फिलहाल सेंटर बंद है और केवल कुछ बच्चे पढ़ने आते हैं। दोबारा संचालन शुरू होने पर सभी जरूरी इंतजाम कर लिए जाएंगे।
अधिकारियों की नजर से कैसे बच रहे ये सेंटर?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब हर साल फायर एनओसी, भवन सुरक्षा और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच के दावे किए जाते हैं तो आखिर ऐसे कोचिंग सेंटर अधिकारियों की नजर से कैसे बच जाते हैं? क्या प्रशासन को हर बार किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई याद आती है?
जिम्मेदार बोले
विद्युत सुरक्षा विभाग को पत्र लिखकर इसकी जिम्मेदारी दी गई है। जल्द ही कोचिंग सेंटर की जांच कराई जाएगी, जहां तार मिलेंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करी जाएगी।
-अनिल कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता, ऊर्जा निगम
लखनऊ के अग्निकांड के बाद पूरे जिले में अभियान चलाया जा रहा है। हर कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया जाएगा, जिसके पास इंतजाम नहीं होंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-राहुल पाल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, गाजियाबाद
सुलगते सवाल
-जिले के कोचिंग सेंटरों का सुरक्षा ऑडिट कराया गया या नहीं?
-कितने संस्थानों के फायर उपकरणों की जांच हुई?
-कितने कोचिंग सेंटरों के पास वैध फायर एनओसी है?
-क्या किसी भी कोचिंग सेंटर में मॉक ड्रिल कराई गई?
-जिन भवनों में आपात निकास नहीं है, उन पर क्या कार्रवाई हुई?
राकेश मार्ग स्थित कोचिंग सेंटर पर खाली पड़ी आग बुझाने की रेत की बाल्टियां। संवाद- फोटो : 1