डीएम के आदेश पर सोमवार को सीडीओ ने जिले के 168 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण कराया। निरीक्षण में न केवल मिड डे मील की गुणवत्ता खराब मिली बल्कि कई स्कूलों में शिक्षिकाएं भी अधिकारियों के सवालों का जवाब नहीं दे पाईं।
स्कूलों की बदतर व्यवस्था से नाराज सीडीओ ने खराब गुणवत्ता वाले भोजन और फल वितरित करने वाले एनजीओ का कनवर्जन कॉस्ट में कटौती करने के आदेश दिए।
सीडीओ कृष्णा करुणेश ने बताया कि डीएम निधि केसरवानी के निर्देश पर शिक्षा की गुणवत्ता, मिड डे मील की गुणवत्ता और अध्यापकों की उपस्थिति की जांच के लिए 24 जिला स्तरीय अधिकारियों को निरीक्षण में लगाया गया।
अधिकारियों की टीम ने सोमवार को जनपद के 168 प्राथमिक विद्यालय/उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया। इस दौरान 13 विद्यालयों में 13 अध्यापक/प्रधान अध्यापक अनुपस्थित मिले। 4 विद्यालयों में सफाई व्यवस्था खराब मिली, 4 विद्यालयों में मिड डे मील वितरण में कमी थी। कहीं केले का साइज छोटा मिला किसी विद्यालय में खिचड़ी अच्छी नहीं पाई गई। प्राथमिक विद्यालय घूकना में एमडीएम की गुणवत्ता खराब थी और खाना लाने वाली गाड़ी पर मक्खी भिनक रही थीं ।
नगरीय क्षेत्र में फलों का वितरण ठीक नहीं पाया गया। यही नहीं 6 विद्यालयों में शौचालय की स्थिति खराब पाई गई और 2 विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था भी खराब निकली। सीडीओ ने बताया कि कई स्कूलों में शिक्षिकाएं ही सिलेबस के सवालों के जवाब नहीं दे पाईं। उन्होंने बताया कि अनुपस्थित पाए गए अध्यापकों का वेतन रोकने के आदेश बीएसए को दिए गए हैं।
हैरत की बात तो यह थी कि विद्यालयों में अनुपस्थित पाए गए शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ में भी नहीं थी। स्कूलों की व्यवस्था हर हाल में एक सप्ताह में सुधारने के लिए बेसिक शिक्षाधिकारी को कड़े निर्देश दिए गए।
निरीक्षण में बंद पाए गए ये विद्यालय
निरीक्षण के दौरान कुछ विद्यालय बंद भी पाए गए। इनमें प्राथमिक विद्यालय गुलधर, प्राथमिक विद्यालय दुहाई, प्राथमिक विद्यालय मिल्क दुहाई, उच्च प्राथमिक विद्यालय दुहाई, उच्च प्राथमिक विद्यालय मोरटा शामिल है।