हापुड़। नई शिक्षा नीति के तहत कक्षा छह से सीबीएसई ने तीसरी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का स्वरूप बदलने लगा है। शहर के अधिकांश निजी विद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो चुकी है। स्कूलों में तीसरी भाषा लागू होने के साथ ही पाठ्यक्रम, समय-सारिणी और संसाधनों में बदलाव करना पड़ा है।
नई व्यवस्था को लेकर स्कूलों में उत्साह के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कई तरह की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। खासकर छात्रों को नई भाषा के उच्चारण, व्याकरण और शब्दावली को समझने में शुरुआती कठिनाई हो रही है। छात्रों का कहना है कि अब तक उनकी पढ़ाई हिंदी और अंग्रेजी तक सीमित थी।
तीसरी भाषा जुड़ने से शुरुआत में थोड़ा दबाव महसूस हो रहा है। श्लोक, संधि-विच्छेद और धातु रूप जैसे विषय नए हैं, जिन्हें समझने में समय लग रहा है। हालांकि अधिकांश छात्रों ने यह भी माना कि नियमित अभ्यास और शिक्षकों के सहयोग से धीरे-धीरे यह आसान हो जाएगा।
डीएवी स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. विनीत त्यागी ने बताया कि संस्कृत पढ़ने से छात्रों का तार्किक और भाषाई विकास बेहतर होता है। शुरुआती महीनों में छात्रों की बुनियादी समझ विकसित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।