कोरोना वाले लक्षण, लेकिन जांच में सामान्य वायरल : आईएमए के पूर्व प्रदेश सचिव व वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीबी जिंदल का कहना है कि ऐसे मरीजों की जांच के बाद पता चलता है कि उनके फेफड़ों में सूजन या संक्रमण की वजह से ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो रहा है। कई मामलों में यह लक्षण कोरोना जैसी गंभीर बीमारियों से मेल खा सकते हैं, लेकिन जांच में यह सामान्य मौसमी संक्रमण ही पाया गया है। इलाज के दौरान मरीजों को आठ से दस दिन तक दवाएं लेनी पड़ रही हैं। अधिकांश मामलों में जल्दी उपचार शुरू होने पर तेजी से सुधार हो रहा है।
दमा और संक्रमण में सांस की तकलीफ में अंतर : वहीं एकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियन के चेयरमैन डॉ. रमन कुमार ने स्पष्ट किया कि दमा और संक्रमण से होने वाली सांस की तकलीफ में अंतर है। दमा एक पुरानी बीमारी है, जो मौसम में बदलाव, धूल, धुएं या एलर्जी के कारण बढ़ती है। जबकि इस समय जो मरीज अस्पताल आ रहे हैं, उनकी तकलीफ अस्थायी संक्रमण की वजह से है। इसमें फेफड़ों के अंदर बलगम जमना, वायुमार्ग में सूजन और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना अहम कारण हैं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि मरीज खुद से दवा लेने के बजाय तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें, ताकि सही कारण और इलाज का निर्धारण हो सके। सांस की समस्या को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, बच्चों और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी वाले लोगों के लिए।
इस तरह से करें संक्रमण व बुखार से बचाव : साफ-सफाई का ध्यान रखना, पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक आहार लेना और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनना जरूरी है। साथ ही तेज बुखार, लगातार खांसी या अचानक सांस फूलने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।