गाजियाबाद। समयसीमा बीतने के बाद भी अधूरी पड़ी रियल एस्टेट परियोजनाओं की डेडलाइन अब बिना जांच के नहीं बढ़ाई जा सकेगी। उत्तर प्रदेश रेरा (रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण) समय विस्तार देने से पहले परियोजनाओं का भौतिक सत्यापन कराएगा। रेरा की तकनीकी शाखा स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण की वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी। इसके बाद ही डेडलाइन बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा।
जिले में वेव सिटी और आदित्य वर्ल्ड सिटी जैसी बड़ी टाउनशिप परियोजनाओं की समयसीमा कई बार निकलने के बावजूद काम पूरा नहीं होने का मामला इस व्यवस्था के लिहाज से अहम है।
समाजसेवी व वेव सिटी निवासी जीवन पंत ने परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति, पूर्णता प्रमाणपत्र और रेरा पोर्टल पर दस्तावेजों को अद्यतन करने में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया था। उनका कहना है कि जमीनी हकीकत की स्वतंत्र जांच होने से खरीदारों को केवल बिल्डर की ओर से दी गई जानकारी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे निर्माण की प्रगति, समय विस्तार और पूर्णता प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
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दो स्थितियों में होगा सत्यापन
रेरा के सलाहकार रितेश सिंह के मुताबिक, परियोजना की डेडलाइन बढ़ाने की प्रक्रिया में भौतिक सत्यापन अहम होगा। पहली स्थिति में बिल्डर खुद समयसीमा बढ़ाने की मांग करता है। ऐसे में परियोजना की वास्तविक स्थिति की जांच के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाता है। दूसरी स्थिति में बिल्डर समय विस्तार के लिए आवेदन नहीं करता, लेकिन परियोजना अधूरी रहने से खरीदारों को परेशानी होती है। ऐसी स्थिति में भी भौतिक सत्यापन कराया जा सकता है। रितेश सिंह के अनुसार, जांच में कमियां मिलने पर बैंकों आदि से मिलने वाले ऋण पर रोक लगाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं। परियोजना को तय समय में पूरा करना बिल्डर की जिम्मेदारी है। ऐसे में भौतिक सत्यापन से निर्माण की वास्तविक प्रगति और खरीदारों के हितों से जुड़े मामलों की स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।