ताकतवर मुस्लिम देशों में पाकिस्तान की पैठ को खत्म करने के लिए मोदी सरकार की ओर से दो वर्ष पूर्व शुरू की गई कूटनीतिक मुहिम अब रंग लाती दिख रही है। इस कड़ी में कभी पाकिस्तान का कट्टर समर्थक रहा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भारत का रणनीतिक भागीदार बनने के लिए तैयार हो गया है।
मंगलवार को भारत दौरे पर पहुंचे इस बार के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि यूएई के शहजादे शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी को अंतिम रूप देंगे।
गौरतलब है कि इससे पहले बीते साल फरवरी में भारत आने के दौरान पीएम मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़ कर शेख नाहयान की अगवानी की थी।विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यूएई के शहजादे के भारत आने से पहले ही रणनीतिक भागदारी से जुड़े समझौतों की जमीन तैयार कर ली गई है।
इसके तहत दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, सुरक्षा सहित कुछ अन्य क्षेत्रों में करीब डेढ़ दर्जन समझौतों पर दस्तखत होंगे। नए सिरे से कच्चे तेल के आयात से जुड़ा समझौता भी होगा।
खास बात यह है कि यूएई मेक इन इंडिया के तहत भारत में हो रहे रक्षा उपकरणों के निर्माण को अपने यहां बाजार की सुविधा देने पर पहले ही सहमत है।रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी के मुताबिक ऐसा पहली बार है जब भारत ने पाकिस्तान के कट्टर समर्थक मुस्लिम देशों से रिश्ते को इतना ज्यादा मजबूत बनाया है।
मुस्लिम देशों से बढ़ रही नजदीकियों के कारण एक भी मुस्लिम देश ने भारत की ओर से पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर उसका साथ नहीं दिया। यहां तक कि इनमें से कई मुस्लिम देशों ने भारत में हुए आतंकी हमले की सार्वजनिक तौर पर निंदा भी की।
इसके अलावा पहली बार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को प्रमुख मुस्लिम देशों का सीधा समर्थन हासिल नहीं हो रहा है।