कहने को तो गाजियाबाद में दो बड़े सरकारी अस्पताल हैं लेकिन सुविधाएं किसी पीएचसी जैसी ही हैं। एमएमजी और जिला संयुक्त अस्पताल में न तो दवाओं का स्टॉक पर्याप्त है न पीने के पानी की उचित व्यवस्था।
गर्मी बढ़ने के साथ ही डायरिया, हीट स्ट्रोक, मलेरिया, डेंगू आदि के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। रोजाना करीब ढाई हजार मरीज यहां पहुंचते हैं। दोनों अस्पतालों में ओआरस के घोल का सीमित स्टॉक बचा है।
इसके अलावा एमएमजी अस्पताल में पैरासिटामोल , एंटीबायोटिक्स, बच्चों के सीरप, दर्द निवारक दवाओं के अलावा आई ड्राप की कमी है। यही कारण है कि पहले सरकारी अस्पतालों में जहां पांच दिन की दवा दी जाती थी, वहीं अब सिर्फ तीन दिन की दवा दी जा रही है।
आमतौर पर मार्च में दवाओं के लिए बजट जारी कर दिया जाता है। अप्रैल के पहले सप्ताह से दवाओं की खेप भी पहुंच जाती है, मगर इस बार बजट लेट है। ऐसे में एमएमजी और संयुक्त जिला अस्पताल में उधार पर दवाएं मंगाई जा रही हैं। संयुक्त जिला अस्पताल में अब तक 16 लाख रुपये की दवाएं उधार मंगाई जा चुकी हैं।
एमएमजी अस्पताल में उधार की यह रकम 65 लाख तक पहुंच गई थी। मंगलवार को 35 लाख का बजट आया मगर अभी भी 25 लाख का बकाया चल रहा है। संयुक्त जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. दिनेश शर्मा और एमएमजी के सीएमएस डॉ. जेके त्यागी ने बताया कि दवाओं का बजट अभी शासन से नहीं आया। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।
दस लाख में लगा था आरओ, अब पड़ा है खराब
जिला एमएमजी अस्पताल में दस लाख की लागत से लगा आरओ सिस्टम खराब पड़ा है। इसकी वजह से मरीजों और तीमारदारों को शुद्ध पानी पीने को नहीं मिल रहा है। तीमारदारों को पीने के लिए या तो घर से पानी लाना पड़ रहा है या फिर बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। अस्पताल में कुछ छोटे-छोटे वाटर कूलर लगे हैं लेकिन वह भी खस्ताहाल हैं।
एसी व कूलर की हालत खस्ता
महिला अस्पताल में जच्चा-बच्चा वार्ड में एसी सिर्फ नाम के लिए है। काफी पुराना होने के कारण वह कूलिंग नहीं करता। कूलर-पंखों की हालत भी खस्ता है। ऐसे में गर्मी के चलते जच्चा-बच्चा दोनों परेशान होते हैं और तीमारदारों का समय पंखा झलते ही बीतता है।