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Ghaziabad News: जिले में पेयजल गुणवत्ता पर सवाल, 237 में से 23 नमूने फेल

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गाजियाबाद। पेयजल की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार मई माह में लिए गए पानी के नमूनों में कई स्थानों पर पानी दूषित पाया गया है। जनवरी से मई तक की अवधि में भी बड़ी संख्या में नमूने फेल मिले हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में पेयजल सुरक्षा एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। विभाग ने संबंधित संस्थानों को नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए हैं। लगातार निगरानी की जा रही है।
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पानी के नमूनों की जांच में सामने आई स्थिति

डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि मई माह में जिले भर से कुल 237 पानी के नमूने एकत्र किए गए थे, जिनमें से 23 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, कई स्थानों पर पानी में गंदगी पाई गई तो कई जगह पर मानक से कई गुना अधिक टीडीएस पाया गया। जनवरी से मई तक पांच महीने में कुल 1507 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 237 नमूने फेल पाए गए। जांच में राइस ऑर्गेनिक होम्स, जयपुरिया ग्रीन, प्लेटिनम-321 सोसायटी, जिंदल पब्लिक स्कूल, सूर्यपुरम, क्रिश्चियन नगर, विनोद कुमार आरो वाटर और जेकेबी औद्योगिक क्षेत्र मोदीनगर सहित कई स्थानों से लिए गए नमूने भी शामिल हैं।



विभागीय कार्रवाई और निगरानी

फेल पाए गए सभी मामलों में संबंधित संस्थानों और संचालकों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से नोटिस जारी किए गए हैं। उन्हें पानी की गुणवत्ता सुधारने और मानकों के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि पेयजल स्रोतों की नियमित जांच की जा रही है ताकि आम लोगों तक सुरक्षित पानी पहुंच सके।
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दूषित पानी से होने वाली बीमारियां

एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आलोक रंजन के अनुसार दूषित पानी के सेवन से कई प्रकार की बीमारियां हो सकती हैं। इनमें डायरिया और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं, हैजा, टायफाइड, पेचिश और वायरल संक्रमण का खतरा रहता है। दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर आंतों को प्रभावित करते हैं, जिससे गंभीर डिहाइड्रेशन भी हो सकता है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका असर अधिक तेजी से दिखाई देता है।



गर्मी और दूषित पानी का बढ़ता खतरा

डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि गर्मी के मौसम में इन बीमारियों का खतरा और बढ़ जाता है। तापमान बढ़ने से पानी जल्दी दूषित होता है और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं। ऐसे में खुले या बिना फिल्टर किए पानी के सेवन से बचना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि उबला हुआ या शुद्ध फिल्टर पानी ही पीना चाहिए और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डॉ. आलोक का कहना है कि पेयजल की गुणवत्ता में सुधार और जागरूकता दोनों ही जरूरी हैं। प्रशासनिक निगरानी के साथ-साथ आम लोगों को भी सावधानी बरतनी होगी, ताकि गर्मी के मौसम में जलजनित बीमारियों से बचाव किया जा सके।
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