गाजियाबाद/मोदीनगर। जिले की तहसीलों में ई-रजिस्ट्री को लेकर शुरू हुआ विरोध अधिवक्ताओं और प्रशासन के बीच टकराव का रूप लेने लगा है। इसको लेकर करीब एक सप्ताह से धरना-प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों का गुस्सा शनिवार को मोदीनगर तहसील में फूट पड़ा। उन्होंने समाधान दिवस के दौरान अधिकारियों को करीब ढाई घंटे तक सभागार में बंधक बनाकर धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारी सुबह करीब 10:30 बजे मोदीनगर तहसील के सभागार में पहुंचे और अधिकारियों के सामने धरने पर बैठ गए। इस दौरान सभागार का गेट बंद कर दिया गया। किसी भी फरियादी को अंदर नहीं जाने दिया गया। गेट पर एक महिला अधिवक्ता कुर्सी डालकर बैठ गईं। इसके चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात को देखते हुए एसडीएम अजीत सिंह ने तहसीलदार रजत सिंह को दूसरे कार्यालय में बैठकर लोगों की समस्याएं सुनने के निर्देश दिए। प्रदर्शन दोपहर करीब एक बजे तक चलता रहा।
इधर, गाजियाबाद तहसील परिसर में भी अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों का विरोध प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने तहसील के कई कार्यालयों के दरवाजे बंद कर दिए, जिससे कामकाज प्रभावित रहा। इस बीच एआईजी स्टांप एसबी चंद्रा ने बैनामा लेखकों के साथ वार्ता की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका।
तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने आरोप लगाया कि ई-रजिस्ट्री की आड़ में रजिस्ट्री प्रक्रिया के निजीकरण की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की ओर से कुछ दस्तावेज दिखाए गए हैं, लेकिन उनसे स्थिति स्पष्ट नहीं हो रही है। जब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार को एसोसिएशन पदाधिकारियों की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
हनुमान चालीसा का किया पाठ
सभागार में आक्रोशित अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों ने ई-पंजीकरण के विरोध में प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नए नियम को काला कानून बताते हुए वापस लेने की मांग की। सपा नेता, भाकियू से जुड़े किसान, समाजसेवी बबली गुर्जर, राहुल प्रधान आदि भी आंदोलनकारियों के समर्थन में धरने पर बैठे। बार एसोसिएशन मोदीनगर के सचिव नकुल त्यागी ने बताया कि आंदोलनकारियों ने वहां सरकार की सद्बुधि के लिए हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। उन्होंने कहा कि इस काले कानून से लाखों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। काला कानून वापस होने तक उनका आंदोेलन जारी रहेगा।
70 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्रभावित
गाजियाबाद में प्रतिदिन औसतन 650 बैनामे होते हैं, जिनसे करीब 8.5 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। 12 जून से तहसीलों में जारी हड़ताल के कारण अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्रभावित हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि हड़ताल से विकास योजनाओं के साथ-साथ आम लोग भी परेशान हो रहे हैं।
विकास योजनाओं पर असर, हरनंदीपुरम योजना के 100 बैनामे अटके
अधिवक्ताओं और बैनामा लेखकों की हड़ताल का असर अब शहर की विकास योजनाओं पर भी दिखाई देने लगा है। सबसे अधिक असर हरनंदीपुरम आवासीय योजना पर पड़ा है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को करीब 48 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण के लिए 100 किसानों की भूमि के बैनामे कराने हैं, लेकिन पिछले एक सप्ताह से यह प्रक्रिया रुकी हुई है। प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के अनुसार, किसानों की सहमति और बैनामे की तैयारी पूरी हो चुकी है, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
इसलिए हो रहा विरोध
विवाद की शुरुआत जून में महानिरीक्षक निबंधन की ओर से जारी उस पत्र के बाद हुई, जिसमें ई-रजिस्ट्री की प्रक्रिया को सीधे पोर्टल के माध्यम से संचालित करने और अधिकृत संस्थाओं के जरिये कार्य कराने की बात कही गई थी। इसके बाद से ही बैनामा लेखक और अधिवक्ता विरोध में उतर आए। हालांकि, एआईजी स्टांप का कहना है कि यह व्यवस्था केवल सरकारी विभागों से संबंधित कुछ रजिस्ट्रियों तक सीमित है। शुक्रवार को महानिरीक्षक निबंधन की ओर से आयोजित ऑनलाइन बैठक में भी स्पष्ट किया गया कि यह व्यवस्था फिलहाल लखनऊ विकास प्राधिकरण में ट्रायल के रूप में लागू की जानी है। सामान्य बैनामों और अन्य रजिस्ट्रियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।