अब एसिड अटैक पीड़ितों को प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए पैसों की चिंता नहीं करनी होगी। वहां पर उनका निशुल्क इलाज होगा और इलाज का सारा खर्च सरकार उठाएगी। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को प्राइवेट अस्पतालों में इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के निर्देश दिए हैं।
एसिड अटैक पीड़ितों के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज, मुआवजा देने के साथ ही एक स्थान पर सभी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सभी जनपदों में आशा ज्योति केंद्र भी बनाए गए। मुआवजा तो ठीक लेकिन सरकारी अस्पताल में इनके इलाज की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी।
किसी भी सरकारी अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन समेत इलाज के लिए जरूरी उपकरण एवं सुविधाएं नहीं होने से पीड़ित को दिल्ली या फिर लखनऊ रेफर करना पड़ता है। मरीजों को अपने जनपद में समय पर इलाज मिले, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने का आदेश जारी किया लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं किया गया।
अब शासन ने सभी जनपदों के सीएमओ को शासनादेश जारी किया है कि इस ओर गंभीरता बरती जाए। साथ ही सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम संचालकों के साथ बैठक करने की बात कर आदेश सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
सीएमओ डॉ. अजेय अग्रवाल ने बताया कि प्राइवेट अस्पतालों से इस संदर्भ में बैठक हो चुकी है और उन्हें इस संबंध में अवगत करा दिया गया है। इसकी प्रगति रिपोर्ट भी शासन को भेजी जाएगी।
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में लटका ताला
जनपद में इकलौता बर्न वार्ड एमएमजी अस्पताल में है, लेकिन पिछले छह वर्ष से बर्न वार्ड पर ताला लगा हुआ है। बर्न वार्ड में स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को कई बार रिमाइंडर भेजने के बावजूद भी स्टाफ की तैनाती नहीं हो सकी है। आलम है कि बर्न वार्ड के उपकरण और एसी आदि खराब हो चुके हैं मरीजों को दिल्ली के अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।
पहली बार एसिड अटैक पीड़ित पुरुष को मिलेगा मुआवजा
क्षतिपूर्ति योजना के तहत पीड़ित को दी जाएगी मुआवजे की धनराशि
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद। पहली बार एसिड अटैक पीड़ित किसी पुरुष को मुआवजा मिलेगा। धौलाना तहसील के सिखेड़ा ग्राम निवासी मोमिन पुत्र साबिर अली को क्षतिपूर्ति योजना के तहत तीन लाख रुपये की सहयोग राशि दी जाएगी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी महेश कंडवाल ने बताया कि मोमिन पर इसी वर्ष एसिड अटैक हुआ था। इसका मुकदमा थाना पिलखुआ में पंजीकृत है और 21 अक्तूबर को मुआवजे के लिए आवेदन किया गया था। डीपीओ ने बताया कि मोमिन ने अपना आवेदन रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत किया था। इसके तहत केवल महिलाओं को ही मुआवजा दिया जाता है, ऐसे में मोमिन का आवेदन रद्द कर दिया गया था। इसके बाद मोमिन ने हाईकोर्ट में रिट दाखिल की। सुनवाई के दौरान कोर्ट द्वारा मोमिन को क्षतिपूर्ति योजना के तहत मुआवजा राशि देने का आदेश जारी किया गया। अब मोमिन को इसी योजना के तहत तीन लाख रुपये की सहयोग राशि दी जाएगी। महेश कंडवाल ने बताया कि यह अपनी तरह का शायद पहला मामला है, जब एसिड अटैक पीड़ित पुरुष को मुआवजा राशि दी जा रही है।