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Ghaziabad News: पुलिस बजा रही जिलाबदर का ढोल, अपराधी कर रहे घर में आराम

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राजू मलिक
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गाजियाबाद। कमिश्नरेट पुलिस भले ही अपराध नियंत्रण के लिए बीट पुलिसिंग का ढोल पीट रही हो, लेकिन इसकी निगरानी में बड़ी चूक सामने आ रही है। इसी का फायदा उठाकर जिलाबदर घोषित अपराधी खुलेआम घर में आराम फरमाते मिल रहे हैं। कई कुख्यात लोगों को धमकाने, रंगदारी मांगने, लूट और हत्या करने से भी नहीं चूक रहे।

लोनी थाना क्षेत्र के बेहटा हाजीपुर निवासी विशाल (22) को पुलिस ने एक अक्तूबर 2025 को जिलाबदर किया था। इसके बावजूद वह घर में मौजूद था और बीते दिनों मारपीट के दौरान कुछ लोगों ने उसकी ईंट से पीट-पीटकर हत्या कर दी।
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ऐसा ही मामला मोदीनगर के गांव पैंगा में देखने को मिला। यहां जिलाबदर घोषित निशांत कुमार घर में ही रह रहा था। इसी दौरान उसने अपने बड़े भाई विक्रांत की हत्या कर दी। पूर्व विधायक के भाई आस मोहम्मद को भी पुलिस ने जिलाबदर घोषित किया था, लेकिन गिरफ्तारी उसी के घर से हुई।
जून 2024 में मोदीनगर निवासी जिलाबदर मोहित उर्फ बादशाह ने निवाड़ी में आम के बाग के ठेकेदार पप्पू और उसके बेटे की दोहरे हत्याकांड में हत्या कर दी थी। इसी इलाके के जिलाबदर गौरव पर पड़ोसियों को हत्या की धमकी देने का आरोप लगा।

मोदीनगर के गांव अमराला निवासी आर्यन को देहात जोन की पुलिस ने जिलाबदर घोषित किया था, लेकिन वह गांव में ही डटा रहा और चिरायू शर्मा नामक युवक पर जानलेवा हमला कर दिया।
नंदग्राम में भी पुलिस ने लूंबा नाम के जिलाबदर को उसके घर से ही गिरफ्तार किया था। इतना ही नहीं, 22 सितंबर 2025 को कुख्यात जितेंद्र को महिला पुलिस टीम ने मुठभेड़ के बाद अपने ही जनपद से दबोचा। कमिश्नर जे. रविंदर गौड़ ने टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार दिया, लेकिन इसकी जांच नहीं हुई कि जिलाबदर होने के बावजूद जितेंद्र घर में कैसे मौजूद था।


सिपाही हत्याकांड में भी शामिल

मसूरी थाना क्षेत्र के नाहल गांव में नोएडा के सिपाही सौरभ की हत्या में भी हिस्ट्रीशीटर और जिलाबदर बदमाशों की संलिप्तता सामने आई। मुख्य आरोपी अब्दुल रहमान पर अलग-अलग थानों में 18 केस दर्ज थे। उसे पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। इस कांड में शामिल दो अन्य आरोपी जिलाबदर थे।


तीन वर्ष में 122 जिलाबदर अपने क्षेत्र से गिरफ्तार
जनवरी 2023 से नवंबर 2025 तक कमिश्नरेट पुलिस ने लूटपाट, डकैती व अन्य अपराधों में शामिल 1,184 आदतन अपराधियों को जिलाबदर किया। इनमें से 122 को उन्हीं के क्षेत्र में रहते गिरफ्तार किया गया।
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बीट पुलिसिंग का मुख्य कार्य गैंगस्टर और जिलाबदर की निगरानी करना है। इसके अलावा आमजन को पुलिस संचालित योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए बीट पुलिसिंग की पहल की गई है। जिलाबदर की निगरानी के लिए उनके घरों की गुप्त रूप से जांच कराई जाएगी।

-आलोक प्रियदर्शी, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, कानून व्यवस्था
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