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Ghaziabad News: पिंक बूथ के बंद दरवाजे पर तड़पती रही फरियाद, 40 मिनट तक खून बहने के बाद युवक की मौत

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सड़क पर पड़ा घायल और बातचीत करती महिला पुलिसकर्मी।
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गाजियाबाद। थानों में फरियादियों के साथ मित्रवत और संवेदनशील व्यवहार का दावा करने वाली कमिश्नरेट पुलिस की कार्यप्रणाली पर रविवार को गंभीर सवाल खड़े हो गए। ऑटो चालक से विवाद के बाद जान बचाने की गुहार लेकर संजयनगर सेक्टर-23 स्थित पिंक बूथ पर पहुंचे 22 वर्षीय राजकुमार को मुख्य गेट बंद मिला। आरोप है कि महिला पुलिसकर्मियों ने कार्यालय का दरवाजा नहीं खोला। घबराहट में उन्होंने दरवाजे के शीशे पर दोनों हाथ दे मारे। कांच टूटकर हाथों में धंसने से घायल राजकुमार 40 मिनट तक तड़पते रहे और अस्पताल में उनकी जान चली गई।
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बिहार के सीवान जिले के गांव बढुलिया निवासी राजकुमार संजयनगर सेक्टर-23 में किराये पर रहकर कार मैकेनिक का काम करते थे। उनके भाई ने बताया कि रविवार दोपहर ऑटो का किराया देने को लेकर उनकी चालक से कहासुनी और धक्कामुक्की हो गई। विवाद के बाद वह भागकर नजदीकी पिंक बूथ पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट बंद मिला। लोहे का गेट नहीं खुलने पर वह दूसरे रास्ते से परिसर में पहुंचे और मदद की गुहार लगाई।
उनका आरोप है कि बूथ इंचार्ज के एयरकंडीशनर लगे कार्यालय में मौजूद महिला पुलिसकर्मियों ने दरवाजा नहीं खोला। इसी दौरान राजकुमार ने दोनों हाथों से शीशे पर जोरदार प्रहार किया। शीशा टूटते ही कांच उसके हाथों में धंस गया और दोनों हाथों की नसें कट गईं। देखते ही देखते वह लहूलुहान हो गए।
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आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने तत्काल उपचार कराने के बजाय पहले अधिकारियों को सूचना दी। बाद में चौकी इंचार्ज के निर्देश पर पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन उसमें भी फर्स्ट एड की सुविधा नहीं थी। एंबुलेंस में तैनात कर्मचारी पास ही स्थित मेडिकल स्टोर से बैंडेज लेकर आए, जिसे राजकुमार के जख्मी हाथों पर बांधकर उनको एमएमजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। आशंका है कि अत्यधिक खून बहने से उनकी जान गई।
परिसर से सड़क तक बिखरा खून बयां कर रहा लापरवाही
स्थानीय लोगों के अनुसार, घटना दोपहर करीब ढाई बजे हुई। घायल राजकुमार पहले पिंक बूथ परिसर में बैठकर मदद मांगते रहे। राहत नहीं मिलने पर वह सड़क पर आए और चीख-पुकार करने लगे। कुछ देर बाद वह बेहोश होकर गिर पड़े। लोगों का दावा है कि घटना के करीब 40 मिनट बाद एंबुलेंस पहुंची। घटनास्थल पर बूथ परिसर से लेकर सड़क तक खून बिखरा मिला, जो पुलिसकर्मियों की लापरवाही बयां कर रहा था। वहीं, घटना के कुछ देर बाद ही पुलिस अधिकारियों ने बूथ के टूटे शीशे बदलवा दिए।
डीसीपी बोले, जांच के बाद होगी कार्रवाई
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल ने कहा कि फरियादी ने शराब पी रखी थी। हालांकि, पुलिसकर्मियों को उसकी बात सुननी चाहिए थी। मामले की जांच के लिए टीम गठित कर दी गई है। जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। परिजनों की तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
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